लघु-कथा: चक्रवर्ती का स्तम्भ – जयशंकर प्रसाद
‘चक्रवर्ती का स्तम्भ’ कथाकार और कवि जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा है। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: चक्रवर्ती का स्तम्भ – जयशंकर प्रसाद Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
‘चक्रवर्ती का स्तम्भ’ कथाकार और कवि जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा है। आप भी पढ़ें:
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दुखिया एक किशोरी थी जिसके ऊपर अपने नेत्रहीन पिता की जिम्मेदारी थी। अपनी नौकरी उसे बड़ी प्यारी थी। फिर ऐसा क्या हुआ जो उसकी नौकरी जाने की नौबत आ गयी। पढ़ें लेखक जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘दुखिया’।
लघु-कथा: दुखिया – जयशंकर प्रसाद Read More
नंदलाल उस नदी के किनारे बैठा अपनी सितारी बजाया करता था। उसे अँधरे से डर नहीं लगता था। ऐसे में जब उसने एक आवाज़ सुनी तो वह हैरान रह गया। आगे उसने क्या किया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘उस पार का योगी’
लघु-कथा: उस पार का योगी – जयशंकर प्रसाद Read More
कुंजनाथ को कुंजबिहारी की उस मूर्ति पर विश्वास नहीं रहा था। आखिर इस अविश्वास का कारण क्या था? क्या कुंजनाथ का विश्वास लौट पाया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘प्रतिमा’
लघु-कथा: प्रतिमा – जयशंकर प्रसाद Read More
शिकार करके घनश्याम जंगल में बैठा शिकार को भून ही रहा था कि उसकी नज़र उस भीलनी पर पड़ी। उसे देखते ही उसके मन में पाप उमड़ पड़ा। आगे क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह कहानी ‘पाप की पराजय’।
कहानी: पाप की पराजय – जयशंकर प्रसाद Read More
कोई उसे अघोरी कहता और कोई योगी। कोई नहीं जानता था कि वो कहाँ से आया था। किशोर अपने परिवार को लेकर घूमने निकला था। ऐसे में वह अघोरी उनके सामने आ गया। आखिर कौन था ये अघोरी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘अघोरी का मोह’।
कहानी: अघोरी का मोह – जयशंकर प्रसाद Read More
बुढ़िया चाहती थी कि वो नौकरी करे। किसी की दी हुई भीख लेना उसके आत्मसम्मान को गवारा नहीं था। ऐसे में बाबू रामनाथ ने उसे अपनी दुकान पर रख लिया। यह बुढ़िया कौन थी? आगे उसका जीवन में क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह लघु-कथा ‘गुदड़ी में लाल’
लघु-कथा: गुदड़ी में लाल – जयशंकर प्रसाद Read More
मोहन ने बहुत दिनों बाद गूदड़ साईं को मोहल्ले में देखा तो उसे आवाज़ लगाई। वह जानना था कि गूदड़ साईं अब उसके घर खाने को क्यों नहीं आता था। गूदड़ साईं ने क्या जवाब दिया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘गूदड़ साईं’
लघु-कथा: गूदड़ साईं – जयशंकर प्रसाद Read More
‘प्रसाद’ जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा है। यह उनके संग्रह प्रतिध्वनि में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: प्रसाद – जयशंकर प्रसाद Read More
चंद्रदेव अपने दोस्त देवकुमार के साथ मसूरी घूमने आया था। चंद्रदेव का मानना था कि वह मनुष्य को समझ सकता है वहीं उसके दोस्त का मानना था कि किसी दूसरे मनुष्य की बात तो दूर व्यक्ति अपने आप को भी समझ नहीं पाता है। आखिर कौन सही साबित हुआ। पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘सुनहला साँप’।
कहानी: सुनहला साँप – जयशंकर प्रसाद Read More
आधी रात होने को आयी थी और वह युवती उस घने जंगल में घूम रही थी। वह युवती कौन थी? रात के इस समय जंगल में क्यों घूम रही थी? क्या उसकी इच्छा पूरी हुई?
लघु-कथा: ज्योतिषमती – जयशंकर प्रसाद Read More