एक ही अंजाम – सुरेन्द्र मोहन पाठक

संस्करण विवरण फॉर्मैट: ई बुक | प्रकाशन: डेली हंट | प्रथम प्रकाशन: 1993 पुस्तक लिंक: अमेज़न कहानी  शाह परिवार के लोग शिवालिक इंडस्ट्रीज पर कई वर्षों से एक छत्र राज करते आए …

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लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक के उपन्यास निम्फोमैनियाक का हुआ लॉन्च

लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा प्रशंसकों की मौजूदगी में किया गया उपन्यास लॉन्च 10 सिपतंबर 2021 को रायपुर के होटल ब्लूबेरी इन में लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक के उपन्यास निम्फोमैनियाक का …

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पुस्तक अंश: एक ही अंजाम – सुरेन्द्र मोहन पाठक

एक ही अंजाम लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक का लिखा हुआ थ्रिलर उपन्यास है। यह उपन्यास पहली बार 1993 में प्रकाशित हुआ था। उपन्यास शिवालिक इंडस्ट्री के दो बड़े शेयरधारकों के …

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ब्लैकमेलर की हत्या – सुरेन्द्र मोहन पाठक

संस्करण विवरण फॉर्मेट: ई बुक | प्रकाशन: डेलीहंट | पृष्ठ संख्या: 115 |  श्रृंखला: सुनील सीरीज #5 | प्रथम प्रकाशन: 1966 किताब लिंक: किंडल  कहानी: दीवानचंद वर्मा एक ऑटो मोबाइल कम्पनी …

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पुस्तक अंश: ब्लैकमेलर की हत्या

ब्लैकमेलर की हत्या लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा लिखा गया उपन्यास है। यह उपन्यास सुनील श्रृंखला का पाँचवा उपन्यास है जो कि 1966 में प्रथम बार प्रकाशित हुआ था।  सुनील …

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सरदार सुरेन्द्र सिंह सोहल की धमाकेदार वापसी है ‘मैं अपराधी जन्म का’

अमित वाधवानी धुले महाराष्ट्र से आते हैं। अपराध साहित्य पढ़ने में उन्हें विशेष रूचि है और सुरेन्द्र मोहन पाठक उनके सबसे पसंदीदा लेखक हैं।  विमल श्रृंखला के ताजातारीन पैंतालीसवें कारनामे  …

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हिन्द पॉकेट बुक्स द्वारा अप्रैल 2021 में प्रकाशित सुरेन्द्र मोहन पाठक के उपन्यास

सुरेन्द्र मोहन पाठक हिन्दी अपराध साहित्य के अज के समय के सर्वोच्च लेखकों में से एक हैं। उनके उपन्यासों का उनके पाठकों को बेसब्री से इन्तजार रहता है।  अप्रैल माह …

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‘निंदक नियरे राखिये’ सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा का तीसरा भाग हुआ रिलीज़

सुरेन्द्र मोहन पाठक हिन्दी के अग्रणी लेखकों में से एक हैं। अपराध गल्प लेखन में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। जितना सुरेन्द्र मोहन पाठक अपने लेखन के लिए …

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आशा – सुरेन्द्र मोहन पाठक

सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा लिखा गया उपन्यास ‘आशा’ एक सामाजिक उपन्यास है। उपन्यास प्रथम बार 1968 में प्रकाशित किया गया था।

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पुस्तक अंश: आशा - सुरेन्द्र मोहन पाठक

पुस्तक अंश: आशा – सुरेन्द्र मोहन पाठक

हिन्दी अपराध साहित्य के मकबूल लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक ने अपने अपराध लेखन से पाठकों का भरपूर मनोरंजन किया है। अपराध लेखन के अलावा उनके लेखन की बात की जाए तो अपनी जीवनी,  बाल उपन्यास और सामाजिक उपन्यास भी उन्होंने लिखे हैं। पेश है उनके एक सामाजिक उपन्यास आशा का एक अंश।

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न बैरी न कोई बेगाना: कुछ आपबीती, कुछ जगबीती

सुरेन्द्र मोहन पाठक आज हिन्दी अपराध साहित्य के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले लेखक हैं। सन 2018 में जब उनकी आत्मकथा का पहला भाग न बैरी न कोई बैगाना प्रकाशित हुआ था तो मित्र राशीद शेख ने पुस्तक पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखी थी। उस वक्त यह लेख एक हिन्दी अखबार में भी प्रकाशित हुआ था। राशीद शेख का लिखा यह लेख बहुत ही खूबसूरत तरीके से किताब के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है। आप भी पढ़िए।

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