कहानी: शांति - प्रेमचंद

कहानी: शांति – प्रेमचंद

देवनाथ कथावाचक के मित्र थे। उनकी असमय मृत्यु होने के पश्चात उनके परिवार पर जो बीती उसी की कथा कथावचक सुना रहे हैं। आखिर देवनाथ के परिवार पर क्या बीती? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘शांति’:

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कहानी: माँ - प्रेमचंद

कहानी: माँ – प्रेमचंद

आदित्य ने अपने आप को समाजसेवा के लिए न्यौछावर कर दिया था। इसका उसे कोई पछतावा भी नहीं था। वह चाहता था कि उसका बेटा भी उसी की राह पर चले। लोगों की निस्वार्थ भलाई करे। उसकी पत्नी अरुणा की भी यही इच्छा थी। आदित्य को पूरा विश्वास था कि अरुणा उनके बेटे प्रकाश को ऐसी परवरिश देगी जो उनके सपनों को साकार करने में मदद करेगी। क्या आदित्य और अरुणा का स्वप्न पूरा हुआ?

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कहानी: झाँकी - प्रेमचंद

कहानी: झाँकी – प्रेमचंद

कई दिन से कथावाचक के घर में कलह मची हुई थी। उसकी माँ और पत्नी आपस में बात नहीं कर रही थीं। इस कारण वह दुखी है। ऐसा क्यों था? क्या कथावाचक का दुख कम हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की यह कहानी ‘झाँकी’:

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कहानी: घर-जमाई - प्रेमचंद

कहानी: घर-जमाई – प्रेमचंद

हरिधन को अब लगने लगा था कि अब उसकी उसके ससुराल में इज़्ज़त नहीं रही थी। उसके ससुराल वाले तो उसकी इज़्ज़त करते नहीं थे साथ में उसे अब लगता था कि उसकी पत्नी गुमानी के नज़र में भी उसकी इज़्ज़त नहीं रही थी। हरिधन को ऐसा क्यों लग रहा था? उसने आगे क्या किया? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘घर-जमाई’:

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कहानी: सुभागी - प्रेमचंद

कहानी: सुभागी – प्रेमचंद

तुलसी महतो अपनी बेटी सुभागी से अपने बेटे के समान ही प्यार करता था। सुभागी थी भी गुणों की खान। सुभागी भी अपने घर वालों को खूब चाहती थी। पर फिर तुलसी के घर के बँटवारे की नौबत आ गयी। ऐसा क्यों हुआ? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘सुभागी’:

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कहानी: शिकार - प्रेमचंद

कहानी: शिकार – प्रेमचंद

वसुधा जब शादी करके कुँवर साहब के घर आयी थी उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा था। वह कुँवर साहब के वैभव से अभिभूत थी। कुँवर साहब से उसे लेना देना अधिक नहीं रहता था। पर अब वही वैभव उसे काटने को दौड़ता था। वहीं कुँवर साहब भी उससे दूर शिकार में मस्त रहते थे। पर अब वसुधा ने कुछ तय कर लिया था। आखिर वसुधा ने क्या फैसला लिया था?

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कहानी: ठाकुर का कुआँ - प्रेमचंद

कहानी: ठाकुर का कुआँ – प्रेमचंद

जोखू की तबीयत खराब थी और इसलिए घर का गंदा पानी उसे गंगा देना नहीं चाहती थी। वह प्यासा था और इसलिए गंगा ने फैसला किया कि ठाकुर के कुएँ से वह पानी लायेगी।
पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘ठाकुर का कुआँ’।

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नशा - प्रेमचंद

कहानी: नशा – प्रेमचंद

प्रेमचंद की कहानी ‘नशा’ दो किशोरों की कहानी है। सामंतवाद के खिलाफ रहने वाला कथावाचक अपने मित्र, जो कि जमींदार घराने से आता है, के गाँव समय बिताने जाता है। वहाँ जो कुछ होता है वही कहानी बनती है। यह मानसरोवर खंड 1 में संकलित है।

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आखिरी हीला - प्रेमचंद | कहानी

कहानी: आखिरी हीला – प्रेमचंद

‘आखिरी हीला’ प्रेमचंद की लिखी हास्यकथा है। कथावाचक को जब पता लगता है कि उसकी पत्नी गाँव से शहर उसके पास आकर रहना चाहती है तो वह उसका शहर आना टालने के लिए क्या क्या बहाने गढ़ता है। आप भी पढ़िए।

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कहानी: ज्योति - प्रेमचंद

कहानी: ज्योति – प्रेमचंद

विधवा होने के बाद बूटी का व्यवहार बहुत कटु हो गया था। अपना गुस्सा वो अपने बड़े बेटे मोहन पर उतारती थी। बूटी के व्यवहार में कटुता क्यों आयी? मोहन पर बूटी के व्यवहार पर क्या असर पड़ा? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘ज्योति’:

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कहानी: कायर - प्रेमचंद

कहानी: कायर – प्रेमचंद

केशव और प्रेमा सहपाठी थे। वह आपस में प्रेम करते थे। केशव का कहना था कि वह जात-पाँत पर विश्वास नहीं करता है और प्रेमा से विवाह करके ही रहेगा। वहीं प्रेमा को ऐसा होना असम्भव लगता था। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की यह कहानी ‘कायर’:

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कहानी: पूस की रात - प्रेमचंद

कहानी: पूस की रात – प्रेमचंद

हल्कू ने वह रुपये कम्बल के लिए बचाए थे। वो कम्बल जिसे उसे रात को खेतों की निगरानी करते हुये ओढ़ना था। पर फिर वो पैसे उसे दे देने पड़े। अब चिंता थी तो यह कि वह खेत में पूस की रात को बिना कम्बल के कैसे बिताएगा। पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘पूस की रात’:

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