कहानी: पूस की रात - प्रेमचंद

कहानी: पूस की रात – प्रेमचंद

हल्कू ने वह रुपये कम्बल के लिए बचाए थे। वो कम्बल जिसे उसे रात को खेतों की निगरानी करते हुये ओढ़ना था। पर फिर वो पैसे उसे दे देने पड़े। अब चिंता थी तो यह कि वह खेत में पूस की रात को बिना कम्बल के कैसे बिताएगा। पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘पूस की रात’:

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आँखों देखी घटना - गोपाल राम गहमरी

कहानी: आँखों देखी घटना – गोपाल राम गहमरी

1 बात सन् 1893की है, जब मैं बंबई से लौटकर मंडला में पहले-पहल पहुँचा था। वहाँ मेरे उपकारी मित्र पंडित बालमुकुंद पुरोहित तहसीलदार थे। उन्हीं की कृपा से मैं मंडला …

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उसने कहा था - चंद्रधर शर्मा गुलेरी

कहानी: उसने कहा था – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

‘उसने कहा था’ चंद्र शर्मा गुलेरी की लिखी कहानी है। ‘उसने कहा था’ को हिंदी की शुरुआती कहानियों में से एक माना जाता है।

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मालगोदाम में चोरी - गोपाल राम गहमरी

कहानी: मालगोदाम में चोरी – गोपाल राम गहमरी

‘मालगोदाम में चोरी’ लेखक गोपाल राम गहमरी की लिखी अपराध कथा है। डुमराँव के बंद मालगोदाम से जब कपड़ों की गठरी की चोरी हुई तो सभी भौंचक्के रह गए। डुमराँव के राजा के माल था तो हलचल मचना लाजमी था। चोर माल ले उड़ा था और छोड़ गया केवल कुछ खर, कुछ पत्थर, कुछ ईंट। अब पुलिस के तरफ से इस मामले की जाँच के लिए एक जासूस आया था। क्या वो जासूस पता लगा पाया कि किसने की ‘मालगोदाम में चोरी’?

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कहानी: बूढ़ी काकी - प्रेमचंद

कहानी: बूढ़ी काकी – प्रेमचंद

बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिह्वा-स्वाद के सिवा और कोई चेष्टा शेष न थी और न अपने कष्टों की ओर आकर्षित करने का, रोने के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा ही।
…पढ़ें लेखक प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘बूढ़ी काकी’:

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कहानी: ग्यारह वर्ष का समय - रामचंद्र शुक्ल

कहानी: ग्यारह वर्ष का समय – रामचंद्र शुक्ल

दिन-भर बैठे-बैठे मेरे सिर में पीड़ा उत्पन्न हुई: मैं अपने स्थान से उठा और अपने एक नए एकांतवासी मित्र के यहाँ मैंने जाना विचारा। जाकर मैंने देखा तो वे ध्यान-मग्न …

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संदेह - जयशंकर प्रसाद

कहानी: संदेह – जयशंकर प्रसाद

रामनिहाल अपना बिखरा हुआ सामान बाँधने में लगा था। जँगले से धूप आकर उसके छोटे-से शीशे पर तड़प रही थी। अपना उज्ज्वल आलोक-खंड, वह छोटा-सा दर्पण बुद्ध की सुंदर प्रतिमा …

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अँगूठी की खोज - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: अँगूठी की खोज – सुभद्रा कुमारी चौहान

‘अँगूठी की खोज’ सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी है। अपने वैवाहिक जीवन से असन्तुष्ट योगेश को एक बार पार्क में एक स्त्रियों का समूह मिल जाता है। उस समूह में मौजूद एक स्त्री वृजांगना की अँगूठी जब खो जाती है तो योगेश उसे उस अँगूठी को ढूँढकर लांकर देने का वादा करता है। अँगूठी की यह खोज जिस थर से इन दोनों किरदारों के जीवन को बदलती है वही कहानी बनती है।

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लघु-कथा: पत्थर की पुकार - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: पत्थर की पुकार – जयशंकर प्रसाद

नवल और विमल टहल रहे थे जब उनके बीच साहित्य को लेकर बहस छिड़ी। इस बहस का विषय क्या था और इसका परिणाम क्या निकला। पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘पत्थर की पुकार’।

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कहानी: कफ़न - प्रेमचंद

कहानी: कफ़न – प्रेमचंद

माधव की जवान पत्नी प्रसव के दौरान चल बसी। माधव और घीसू, जिनके खाने के भी लाले थे, अब उसके लिए कफ़न का इंतज़ाम करने निकल पड़े। पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की लिखी यह प्रसिद्ध कहानी ‘कफ़न’:

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लघु-कथा: कलावती की शिक्षा - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: कलावती की शिक्षा – जयशंकर प्रसाद

श्यामसुंदर और कलावती के बीच सोने को लेकर खटपट होना आम बात थी। श्यामसुंदर बैठकर उपन्यास पढ़ना चाहता था और कलावती सोना चाहती थी। जब सोना मुमकिन न हुआ तो कलावती एक चीनी की पुतली लेकर उसे शिक्षा देने लगी। आखिर ये शिक्षा क्या थी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह लघु-कथा ‘कलावती की शिक्षा’।

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लघु-कथा: खंडहर की लिपि -जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: खंडहर की लिपि – जयशंकर प्रसाद

वह युवक उस मंदिर के अवशेष देखने बार बार जाया करता था। उसी मंदिर में एक जगह कुछ लिखा था। एक अनजान सी लिपि थी जिसे वो समझना चाहता था। क्या उसकी जिज्ञासा क्या शांत हुई? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘खंडहर की लिपि’।

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