हिंदी के मशहूर लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक के प्रशंसकों के लिए अच्छी खबर आयी है। उनका लिखा जासूसी उपन्यास ‘स्टॉप प्रेस’ अब प्री ऑर्डर के लिए उपलब्ध है। यह सुनील शृंखला का उपन्यास है जो कि प्रथम बार 1995 में राजा पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुआ था। इसके बाद इसका रीप्रिंट डायमंड पॉकेट बुक्स से 1999 में आया था लेकिन 1999 से लेकर अब तक यानी लगभग 27 सालों से यह उपन्यास आउट ऑफ प्रिंट चल रहा था। अब साहित्य विमर्श प्रकाशन इसे नयी साज सज्जा के साथ पाठकों के समक्ष लेकर आया है।
‘स्टॉप प्रेस’ एक रहस्य कथा है जिसमें ब्लास्ट नामक अखबार का इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट सुनील कुमार चक्रवर्ती एक कत्ल के पीछे छिपे रहस्य का पता लगाता दिखता है।

क्या होता है स्टॉप प्रेस?
स्टॉप प्रेस अक्सर उन महत्पूर्ण खबरों को कहा जाता था जिन्हें आखिरी में अखबार में जोड़ा जाता था। यह काम अक्सर तब होता था जब अखबार प्रिंट होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी। अक्सर ऐसी खबरों के लिए खाली जगह अखबारों में छोड़ दी जाती थी और खबर आने पर प्रिंटिंग रोककर उस खाली छोड़ी जगह में उस खबर को प्रिंट कर दिया जाता था। आजकल ब्रेकिंग न्यूज के रूप में यह खबरें प्रचलित हैं।
कौन है सुनील कुमार चक्रवर्ती
सुनील कुमार चक्रवर्ती ब्लास्ट का इनवेस्टिगेटिव रिपोर्टर है जो अपने पेशे के चलते ऐसे मामलों से दो चार होता रहता है जिसमें रहस्य का पुट होता है। अक्सर इन मामलों को सुलझाने में उसकी मदद उसका दोस्त रमाकांत अपने कर्मचारियों जौहरी इत्यादि के माध्यम से करता है। अब तक सुरेन्द्र मोहन पाठक इस किरदार को लेकर 122 से ऊपर उपन्यास लिख चुके हैं। सुनील को लेकर लिखा उनका पहला उपन्यास 1963 में प्रकाशित ‘पुराने गुनाह नये गुनाहगार’ था और सबसे आखिरी उपन्यास 2018 में प्रकाशित ‘कॉनमैन’ था। ‘स्टॉप प्रेस’ सुनील को लेकर लिखा गया उनका 102वाँ उपन्यास है।
कहाँ कर सकते हैं स्टॉप प्रेस प्री ऑर्डर?
पाठक पुस्तक को साहित्य विमर्श की वेबसाइट और अमेज़न से प्री ऑर्डर कर सकते हैं।
बताते चलें इस साल सुरेन्द्र मोहन पाठक की इससे पूर्व दो और किताबें रीप्रिंट हो चुकी हैं। इन रिप्रिंट हुई किताबों में एक रोमांचकथा ‘एक ही अंजाम‘ और सुरेन्द्र मोहन पाठक का सबसे अधिक बिकने वाला उपन्यास ‘65 लाख की डकैती‘ भी शामिल है। यह दोनों ही रचनाएँ साहित्य विमर्श प्रकाशन (एक ही अंजाम, 65 लाख की डकैती) की वेबसाइट और अमेज़न (एक ही अंजाम, 65 लाख की डकैती) पर मौजूद हैं। वहीं साहित्य विमर्श प्रकाशन से उनकी आत्मकथा का पाँचवाँ खंड ‘एक सीस का मानवा’ भी जनवरी में आया था। यह भी अमेज़न और साहित्य विमर्श प्रकाशन की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
