कहानी: ग्राम - जयशंकर प्रसाद

कहानी: ग्राम – जयशंकर प्रसाद

‘ग्राम’ जयशंकर प्रसाद की वह पहली कहानी है जो कि प्रकाशित हुई थी। यह कहानी ‘इंदु’ पत्रिका में सन् 1912 में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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साहित्य का आधार - प्रेमचंद

साहित्य का आधार – प्रेमचंद

साहित्य क्या है? साहित्य और प्रोपागैंडा में क्या फर्क है? वह क्या है जो साहित्य से प्रोपोगैंडा को जुदा करता है? इन्हीं सब बातों को साफ करते हुए प्रेमचंद ने 1932 में ये लेख लिखा था। आप भी पढ़ें:

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कहानी: दुलाईवाली - राजेंद्र बाला घोष (बंग महिला)

कहानी: दुलाईवाली – राजेंद्र बाला घोष (बंग महिला)

नवलकिशोर और वंशीधर गहरे मित्र थे। जब नवलकिशोर अपनी नयी नवेली दुल्हन को लेकर आ रहे थे तो उन्होंने वंशीधर को भी अपने साथ चलने को कहा। आगे क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें राजेंद्रबाला घोष (बंग महिला) द्वारा लिखी कहानी दुलाईवाली:

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कहानी: मौसी - भुवनेश्वर

कहानी: मौसी – भुवनेश्वर

लोग समझते थे कि बिब्बो हमेशा से ही अकेली रहती आयी है, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। पर अब बिब्बो ने अपने एकाकीपन से समझोता कर लिया था। इतने समय बाद फिर एक बार उसका एकाकीपन टूटने को था। आखिर ऐसा क्या हुआ था? जानने के लिए पढ़ें भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव की कहानी ‘मौसी’।

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कहानी: राजकुमारी हिमांगिनी - महावीर प्रसाद द्विवेदी

कहानी: राजकुमारी हिमांगिनी – महावीर प्रसाद द्विवेदी

राजकुमारी हिमांगिनी बहुत सुंदर थीं और उन्हें लगता था कि इतनी सुंदर होने के नाते उन्हें सामान्य जीवों के साथ नही रहना चाहिए। यही कारण था उन्होंने पर्वत के सबसे ऊँचे शिखर पर अपना घर बनाया। पर काफी समय गुजरने के बाद वो साथ के लिए तरसने लगीं। वह विवाह करना चाहती थीं। क्या उनकी यह चाहत पूरी हुई? पढ़ें महावीर प्रसाद द्विवेदी की कहानी ‘राजकुमारी हिमांगिनी’।

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अज्ञानता का आनंद - विनय प्रकाश तिर्की

अज्ञानता का आनंद – विनय प्रकाश तिर्की

अज्ञानता में वैसे तो आनंद है लेकिन कभी कभी इस कारण तगड़ा नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। अपने ऐसे ही एक अनुभव को लेखक इस आलेख में साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें विनय प्रकाश तिर्की का यह संस्मरण ‘अज्ञानता का आनंद’:

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कहानी: चतुरी चमार - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

कहानी: चतुरी चमार – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

कथावाचक उन दिनों गाँव में रहने लगा था। उसके घर के नज़दीक ही चतुरी रहता था जो कि जूते का काम करता था। कौन था ये चतुरी चमार? कथावाचक से उसके और गाँव के अन्य सदस्यों के साथ कैसे सम्बंध थे? जानने के लिए पढ़ें सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कहानी ‘चतुरी चमार’।

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लघु-कथा: साँप का मणि - प्रेमचंद

लघु-कथा: साँप का मणि – प्रेमचंद

कथावाचक को जब पता लगा कि उसका दोस्त उसे साँप का मणि दिलवा सकता है तो उसका हैरान होना लाज़मी था। आखिर क्या था ये मणि? क्या असल में ये साँप का मणि था? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की यह लघु-कथा ‘साँप का मणि’।

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कहानी: रूपी - राहुल सांकृत्यायन

कहानी: रूपी – राहुल सांकृत्यायन

मधुपुरी की नगरी अपनी खूबसूरती के लिए प्रख्यात थी। कहा जाता है जितनी खूबसूरत यह मधुपुरी थी उतनी ही खूबसूरत यहाँ की तरुणियाँ थीं। रूपी भी ऐसी ही युवती थी जिसे अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता था। लेकिन फिर उसे अपने शरीर को बेचने पर मजबूर होना पड़ा। रूपी को ऐसा क्यों करना पड़ा और इसका उसे क्या खामियाजा चुकाना पड़ा? जानने के लिए पढ़ें राहुल सांकृत्यायन की कहानी ‘रूपी’:

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कहानी: मूल्य - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: मूल्य – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

आमला के पिता नवीन के कर्जदार थे। ऐसे में जब आमला की शादी नवीन से हुई तो आमला को लगा था उसे कर्ज के बदले नवीन द्वारा खरीदा गया था। नवीन को जब यह बात पता लगी तो उसने आमला से कहा कि वह उसका दिल जीत लेगा। और आमला का मन था कि वह किसी तरह नवीन का कर्जा उतारकर खुद का मूल्य चुका दे। क्या दोनों की यह इच्छाएँ पूरी हुईं? जानने के लिए पढ़ें आचार्य चतुरसेन शास्त्री की कहानी ‘मूल्य’।

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कहानी: भग्नावशेष - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: भग्नावशेष – सुभद्रा कुमारी चौहान

कथावाचक ने एक कवि सम्मेलन में उन्हें देखा था और उनकी कविताओं का प्रशंसक बन गया था। पर फिर उनकी कविताएँ आनी बंद हो गयी। आखिर ऐसा क्यों हुआ? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘भग्नावशेष’।

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कार गयी खाई में… …और कहानी खत्म - योगेश मित्तल

कार गयी खाई में… …और कहानी खत्म – योगेश मित्तल

दत्त भारती के उपन्यास पाठकों की पसंद रहते थे। योगेश मित्तल भी उनके प्रशंसकों में से एक थे। दत्त भारती असल जीवन में कैसे थे और किस तरह उनके एक उपन्यास की कहानी बनी यह वह इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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