नाना पाटेकर पर निलेश विक्रम

विक्रम की डायरी: अपने निभाए किरदारों और अपने सामाजिक कार्यों के चलते लम्बे समय तक गुंजायमान रहेगा नाना पाटेकर का नाम

नाना पाटेकर ने अपने निभाए किरदारों के माध्यम से भारतीय फिल्म जगत में अपना एक अलग मुकाम बनाया था। उन्होंने दर्शकों के मन पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी थी। उनकी फिल्मों और उनके जीवन को याद करते हुए नीलेश विक्रम ने यह लेख लिखा है। आप भी पढ़ें:

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कागज़ की नाव - सुरेंद्र मोहन पाठक | विक्रम की डायरी

विक्रम की डायरी: पहले पन्ने से अपने मोहपाश में बाँध देती है ‘कागज की नाव’

नीलेश ‘विक्रम’ हिंदी साहित्य और हिंदी सिनेमा में विशेष रूचि रखते है और इन विषयो पर अक्सर अपने विचार लिखा करते हैं। एक बुक जर्नल पर पढ़िए लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक के उपन्यास ‘कागज की नाव’ पर उनकी लिखी यह पाठकीय टिप्पणी:

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एक करोड़ का जूता - सुरेंद्र मोहन पाठक
इंद्रप्रिया - सुधीर मौर्य | साहित्य विमर्श प्रकाशन

ओरछा की राय प्रवीन के अद्भुत शौर्य और बुद्धिमत्ता की कहानी है ‘इंद्रप्रिया’

‘इंद्रप्रिया’ लेखक सुधीर मौर्य का लिखा ऐतिहासिक गल्प है। ओरछा की रानी इंद्रप्रिया को केंद्र में रखकर यह उपन्यास लिखा गया है।  उपन्यास साहित्य विमर्श प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। उपन्यास पर यह टिप्पणी नीलेश ‘विक्रम’ ने लिखी है। आप भी पढ़ें:

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