यात्रा वृत्तांत: …तो यहाँ रहा करते थे शरतचंद्र
लेखिका रुपाली ‘संझा’ को पढ़ने लिखने के साथ घूमने-फिरने का भी शौक है। जब वह लिख पढ़ रही नहीं होती हैं तो घूमती हैं। फिर अपने लेखों के माध्यम से वह पाठक को उस की गयी यात्रा पर ले चलती हैं। एक बुक जर्नल पर हम उनका ऐसा ही एक लेख प्रस्तुत कर रहे हैं। अपने इस लेख के माध्यम से वह पाठक को ‘शरतकुटीर’ की यात्रा पर साथ ले जा रही हैं। आप भी चलिए:
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