खाकी और खद्दर | राज कॉमिक्स | तरुण कुमार वाही

संस्करण विवरण: फॉर्मैट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 64 | प्रकाशक: राज कॉमिक्स | शृंखला: डोगा टीम लेखक: तरुण कुमार वाही | कथानक: संजय गुप्ता, विवेक मोहन | चित्रांकन: मनु | …

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लघु-कथा: पत्थर की पुकार - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: पत्थर की पुकार – जयशंकर प्रसाद

नवल और विमल टहल रहे थे जब उनके बीच साहित्य को लेकर बहस छिड़ी। इस बहस का विषय क्या था और इसका परिणाम क्या निकला। पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘पत्थर की पुकार’।

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कहानी: कफ़न - प्रेमचंद

कहानी: कफ़न – प्रेमचंद

माधव की जवान पत्नी प्रसव के दौरान चल बसी। माधव और घीसू, जिनके खाने के भी लाले थे, अब उसके लिए कफ़न का इंतज़ाम करने निकल पड़े। पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की लिखी यह प्रसिद्ध कहानी ‘कफ़न’:

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मेजर शैतान सिंह | राष्ट्रीय पुस्तक न्यास | गौरव सी सावंत

मेजर शैतान सिंह | राष्ट्रीय पुस्तक न्यास | गौरव सी सावंत

संस्करण विवरण: फॉर्मैट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 22 | प्रकाशन: राष्ट्रीय पुस्तक न्यास | शृंखला: वीरगाथा माला  टीम  लेखक: गौरव सी सावंत | अनुवाद: सुधीर नाथ झा | चित्र एवं …

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लघु-कथा: कलावती की शिक्षा - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: कलावती की शिक्षा – जयशंकर प्रसाद

श्यामसुंदर और कलावती के बीच सोने को लेकर खटपट होना आम बात थी। श्यामसुंदर बैठकर उपन्यास पढ़ना चाहता था और कलावती सोना चाहती थी। जब सोना मुमकिन न हुआ तो कलावती एक चीनी की पुतली लेकर उसे शिक्षा देने लगी। आखिर ये शिक्षा क्या थी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह लघु-कथा ‘कलावती की शिक्षा’।

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लघु-कथा: खंडहर की लिपि -जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: खंडहर की लिपि – जयशंकर प्रसाद

वह युवक उस मंदिर के अवशेष देखने बार बार जाया करता था। उसी मंदिर में एक जगह कुछ लिखा था। एक अनजान सी लिपि थी जिसे वो समझना चाहता था। क्या उसकी जिज्ञासा क्या शांत हुई? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘खंडहर की लिपि’।

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कहानी: बड़े भाई साहब - प्रेमचंद

कहानी: बड़े भाई साहब – प्रेमचंद

‘बड़े भाई साहब’ कथाकार प्रेमचंद की लिखी कहानी है। कहानी का कथावाचक एक किशोर है जो अपने बड़े भाई साहब और अपने विषय में पाठकों को बता रहा है। वह हॉस्टल में अपने बड़े भाई साहब के साथ रहता है। उनके बीच का रिश्ता कैसा है यह इस कहानी में झलकता है। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: प्रलय - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: प्रलय – जयशंकर प्रसाद

‘प्रलय’ लेखक जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा है। इसमें लेखक पौराणिक पात्रों को लेकर प्रलय के दिन की कल्पना करते हैं। इन दो पात्रों के बीच जो बातचीत होती है उसके माध्यम से प्रलय और उसके महत्व को भी दर्शाते हैं। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: चक्रवर्ती का स्तम्भ -जयशंकर प्रसाद
लघु-कथा: दुखिया - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: दुखिया – जयशंकर प्रसाद

दुखिया एक किशोरी थी जिसके ऊपर अपने नेत्रहीन पिता की जिम्मेदारी थी। अपनी नौकरी उसे बड़ी प्यारी थी। फिर ऐसा क्या हुआ जो उसकी नौकरी जाने की नौबत आ गयी। पढ़ें लेखक जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘दुखिया’।

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लघु-कथा: सहयोग-जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: सहयोग – जयशंकर प्रसाद

मोहन को लगता था पत्नी को उसकी दासी होना चाहिए। उसने ये कर भी दिखाया था। पर अब वो खुश नहीं था। ऐसा क्यों? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘सहयोग’।

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लघु-कथा: उस पार का योगी - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: उस पार का योगी – जयशंकर प्रसाद

नंदलाल उस नदी के किनारे बैठा अपनी सितारी बजाया करता था। उसे अँधरे से डर नहीं लगता था। ऐसे में जब उसने एक आवाज़ सुनी तो वह हैरान रह गया। आगे उसने क्या किया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘उस पार का योगी’

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