कहानी: इंद्रजाल – जयशंकर प्रसाद
जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘इंद्रजाल’ प्रथम बार इसी नाम से प्रकाशित उनके कहानी संग्रह में 1961 में प्रकाशित हुई थी। अब एक बुक जर्नल पर पढ़ें गोली और बेला की यह प्रेमकथा।
कहानी: इंद्रजाल – जयशंकर प्रसाद Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘इंद्रजाल’ प्रथम बार इसी नाम से प्रकाशित उनके कहानी संग्रह में 1961 में प्रकाशित हुई थी। अब एक बुक जर्नल पर पढ़ें गोली और बेला की यह प्रेमकथा।
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‘आखिरी हीला’ प्रेमचंद की लिखी हास्यकथा है। कथावाचक को जब पता लगता है कि उसकी पत्नी गाँव से शहर उसके पास आकर रहना चाहती है तो वह उसका शहर आना टालने के लिए क्या क्या बहाने गढ़ता है। आप भी पढ़िए।
कहानी: आखिरी हीला – प्रेमचंद Read More
‘भाई बहन’ राजेन्द्र बाला घोष की लिखी कहानी है जो कि बाल प्रभाकर पत्रिका में 1908 में प्रकाशित हुई थी। कहानी में स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के महत्व के विषय में बताया गया है। पढ़ें यह कहानी:
कहानी: भाई-बहन – राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला) Read More
सब कुछ कितना खूबसूरत था यहाँ। उनके घर के आगे का बरामदा था जहाँ बेंत की कुर्सी और मोढ़े को लगाकर बैठते हुए शाम गुजारना उसे पसंद था। यह जगह उसकी सबसे प्रिय जगहों में से थी। वो इधर बैठकर घंटों कल्पना के सागर में गोते लगा सकती थी या सामने दिखते दृश्यों को निहार सकती थी।
कहानी: गुंजन – विकास नैनवाल ‘अंजान’ Read More
जग्गैया और कामैया एक साथ खेला करते थे। उनके बीच चुहलबाज़ी चलती रहती थी। फिर उनके बीच अनबोला हो गया। ये अनबोला क्यों हुआ? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा ‘अनबोला’:
लघु-कथा: अनबोला – जयशंकर प्रसाद Read More
राधे की बूढ़ी माँ मंदिर के बाहर ही अपनी दुकान लगाती थी और राधे ताड़ी पीने में ही अपना समय बिता देता था। वृद्धा ने सोचा भी नहीं था मंदिर में राधे के कारण कुछ होगा। फिर कुछ हुआ। क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘विराम चिन्ह’।
लघु-कथा: विराम चिन्ह – जयशंकर प्रसाद Read More
पाठशाला का वार्षिकोत्सव था। मैं भी वहाँ बुलाया गया था। वहाँ के प्रधान अध्यापक का एकमात्र पुत्र, जिसकी अवस्था आठ वर्ष की थी, बड़े लाड़ से नुमाइश में मिस्टर हादी …
लघु-कथा: पाठशाला – चंद्रधर शर्मा गुलेरी Read More
1 बात सन् 1893की है, जब मैं बंबई से लौटकर मंडला में पहले-पहल पहुँचा था। वहाँ मेरे उपकारी मित्र पंडित बालमुकुंद पुरोहित तहसीलदार थे। उन्हीं की कृपा से मैं मंडला …
कहानी: आँखों देखी घटना – गोपाल राम गहमरी Read More
‘उसने कहा था’ चंद्र शर्मा गुलेरी की लिखी कहानी है। ‘उसने कहा था’ को हिंदी की शुरुआती कहानियों में से एक माना जाता है।
कहानी: उसने कहा था – चंद्रधर शर्मा गुलेरी Read More
‘मालगोदाम में चोरी’ लेखक गोपाल राम गहमरी की लिखी अपराध कथा है। डुमराँव के बंद मालगोदाम से जब कपड़ों की गठरी की चोरी हुई तो सभी भौंचक्के रह गए। डुमराँव के राजा के माल था तो हलचल मचना लाजमी था। चोर माल ले उड़ा था और छोड़ गया केवल कुछ खर, कुछ पत्थर, कुछ ईंट। अब पुलिस के तरफ से इस मामले की जाँच के लिए एक जासूस आया था। क्या वो जासूस पता लगा पाया कि किसने की ‘मालगोदाम में चोरी’?
कहानी: मालगोदाम में चोरी – गोपाल राम गहमरी Read More
बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिह्वा-स्वाद के सिवा और कोई चेष्टा शेष न थी और न अपने कष्टों की ओर आकर्षित करने का, रोने के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा ही।
…पढ़ें लेखक प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘बूढ़ी काकी’:
दिन-भर बैठे-बैठे मेरे सिर में पीड़ा उत्पन्न हुई: मैं अपने स्थान से उठा और अपने एक नए एकांतवासी मित्र के यहाँ मैंने जाना विचारा। जाकर मैंने देखा तो वे ध्यान-मग्न …
कहानी: ग्यारह वर्ष का समय – रामचंद्र शुक्ल Read More