वो कौन था? | गजानन रैना | रैना उवाच

वो कौन था? | गजानन रैना | रैना उवाच

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं।आज वह अपने खास अंदाज में एक रचनाकर के विषय में बता रहे हैं? बताइए तो वह कौन था?

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पद्म सिंह शर्मा के साथ तीन दिन - प्रेमचंद

पद्म सिंह शर्मा के साथ तीन दिन – प्रेमचंद

पद्म सिंह शर्मा हिंदी के निबंधकार, आलोचक थे। प्रेमचंद के साथ इनके प्रगाढ़ सम्बन्ध थे। 1932 में पद्म सिंह शर्मा देहावसान के पश्चात प्रेमचंद ने यह लेख उनकी याद में लिखा था। आप भी पढ़ें:

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निबंध: साहित्य की महत्ता - महावीर प्रसाद द्विवेदी

निबंध: साहित्य की महत्ता – महावीर प्रसाद द्विवेदी

साहित्य का जीवन और समाज के लिए क्या महत्व है? क्यों साहित्य पढ़ना जरूरी है और किस तरह का साहित्य पढ़ा जाना चाहिए? यह महावीर प्रसाद द्विवेदी ‘साहित्य की महत्ता’ में बताते हैं। आप भी पढ़ें।

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एक रात - रांगेय राघव

एक रात – रांगेय राघव

‘एक रात’ रांगेय राघव का लिखा रिपोर्ताज है। इसमें उन्होंने अकाल के समय के बंगाल की स्थिति को दर्शाया है। आप भी पढ़ें यह मार्मिक रिपोर्ताज:

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मरेंगे साथ, जिएँगे साथ - रांगेय राघव

मरेंगे साथ, जिएँगे साथ – रांगेय राघव

‘मरेंगे साथ, जिएँगे साथ’ रांगेय राघव का लिखा रिपोर्ताज है। एक डॉक्टरी दल के साथ जब वो गाँव में टीका लगाने गए तो वहाँ की क्या हालत थी और उधर उनके क्या अनुभव रहे यह वह इधर बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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अदम्य जीवन - रांगेय राघव

अदम्य जीवन – रांगेय राघव

‘अदम्य जीवन’ लेखक रांगेय राघव का लिखा एक रिपोर्ताज है। इसमें ढाका के एक गाँव शिद्धिरगंज जाकर उन्होंने वहाँ जो कुछ देखा वो बताया गया है। बंगाल में हुए अकाल और महामारी के बाद यह यात्रा की गयी थी जिसमें गाँव के जीवन पर पड़े असर और गाँव वासियों की जीवटता का मार्मिक चित्रण वो करते हैं।

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बाँध भँगे दाओ -रांगेय राघव

बाँध भँगे दाओ -रांगेय राघव

‘बाँध भँगे दाओ’ रांगेय राघव का लिखा रिपोर्ताज है जिसमें उन्होंने कलकत्ते से कुष्टिया नामक कस्बे में आगमन के विषय में बताया है। बंगाल के अकाल और महामारी के बाद उन्होंने यहाँ का दौरा किया था। इस दौरान कैसे वहाँ जमाखोरी हो रही थी और जनता उससे कैसे लड़ी इसी का ब्योरा उन्होंने इधर दिया है। आप भी पढ़ें:

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निबंध: जीवन में साहित्य का स्थान - प्रेमचंद

निबंध: जीवन में साहित्य का स्थान – प्रेमचंद

जीवन में साहित्य का स्थान प्रेमचंद का लिखा निबंध है। यह 1932 के हंस के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:

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वो कौन था? | गजानन रैना | रैना उवाच

वो कौन था? | गजानन रैना | रैना उवाच

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं।आज वह अपने खास अंदाज में एक लेखक के विषय में बता रहे हैं? …

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फसाने जैसा फसानेकार: अगाथा और पोइरो

अगाथा और पोइरो; स्रोत: विकिपीडिया, पिक्साबे गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं। उन्होंने रहस्यकथाओं की रानी कही जाने वाली …

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किस्सा ए काफ्का | रैना उवाच

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं। उन्होंने फ्रांज़ काफ्का के ऊपर लिखा है। आप भी पढ़िए उनकी यह टिप्पणी।  …

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वो कौन था? | गजानन रैना | रैना उवाच

वो कौन था? | गजानन रैना | रैना उवाच

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं।आज वह अपने खास अंदाज में एक लेखक के विषय में बता रहे हैं? …

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