कहानी: आसक्ति – निशांत मौर्य
निशांत मौर्य कानपुर के रहने वाले हैं। साहित्य से उन्हें गहरा लगाव है। एक बुक जर्नल पर पढ़िए उनकी कहानी आसक्ति।
कहानी: आसक्ति – निशांत मौर्य Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
निशांत मौर्य कानपुर के रहने वाले हैं। साहित्य से उन्हें गहरा लगाव है। एक बुक जर्नल पर पढ़िए उनकी कहानी आसक्ति।
कहानी: आसक्ति – निशांत मौर्य Read More
शिवपूजन सहाय उपन्यासकार, संपादक और गद्यकार थे। उन्होंने हिंदी और भोजपुरी भाषा में लेखन किया। पढ़ें उनकी कहानी ‘कहानी का प्लॉट’।
कहानी: कहानी का प्लॉट – शिवपूजन सहाय Read More
जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘इंद्रजाल’ प्रथम बार इसी नाम से प्रकाशित उनके कहानी संग्रह में 1961 में प्रकाशित हुई थी। अब एक बुक जर्नल पर पढ़ें गोली और बेला की यह प्रेमकथा।
कहानी: इंद्रजाल – जयशंकर प्रसाद Read More
‘आखिरी हीला’ प्रेमचंद की लिखी हास्यकथा है। कथावाचक को जब पता लगता है कि उसकी पत्नी गाँव से शहर उसके पास आकर रहना चाहती है तो वह उसका शहर आना टालने के लिए क्या क्या बहाने गढ़ता है। आप भी पढ़िए।
कहानी: आखिरी हीला – प्रेमचंद Read More
‘भाई बहन’ राजेन्द्र बाला घोष की लिखी कहानी है जो कि बाल प्रभाकर पत्रिका में 1908 में प्रकाशित हुई थी। कहानी में स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के महत्व के विषय में बताया गया है। पढ़ें यह कहानी:
कहानी: भाई-बहन – राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला) Read More
सब कुछ कितना खूबसूरत था यहाँ। उनके घर के आगे का बरामदा था जहाँ बेंत की कुर्सी और मोढ़े को लगाकर बैठते हुए शाम गुजारना उसे पसंद था। यह जगह उसकी सबसे प्रिय जगहों में से थी। वो इधर बैठकर घंटों कल्पना के सागर में गोते लगा सकती थी या सामने दिखते दृश्यों को निहार सकती थी।
कहानी: गुंजन – विकास नैनवाल ‘अंजान’ Read More
हिन्दी की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘आलोचना’ की आधिकारिक वेबसाइट सोमवार से शुरू हो गई है। वेबसाइट पर आलोचना के पुराने अंकों के लेखों के साथ नई पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध होगी। आलोचना पिछले सात दशक से भी अधिक समय से हिन्दी पाठकों की सबसे प्रिय पत्रिकाओं में शुमार रही है। वेबसाइट से आलोचना के लेख और पाठ्य सामग्री तक पाठकों की पहुँच और भी आसान हो जाएगी।
हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘आलोचना’ की वेबसाइट शुरू Read More
गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। समय समय पर सोशल मीडिया पर साहित्यिक कृतियों पर अपने खास अंदाज में टिप्पणी करते रहते हैं। आज पढ़िए शम्सुर्रहमान फारुकी के प्रसिद्ध उपन्यास कई चाँद थे सरे-आसमां पर लिखी उनकी यह संक्षिप्त टिप्पणी।
गेस्ट पोस्ट: कई चाँद थे सरे-आसमां – शम्सुर्रहमान फारुकी | रैना उवाच Read More
संस्करण विवरण: फॉर्मैट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 92 | प्रकाशक: हिंद पॉकेट बुक्स पुस्तक लिंक: अमेज़न कहानी वसुधा घर की बड़ी बेटी थी। पिता के लकवाग्रस्त होने पर घर की …
छाया मत छूना मन – हिमांशु जोशी | हिंद पॉकेट बुक्स Read More
किताब परिचय यह पुस्तक सिर्फ महाभारत की कथा का पुनर्पाठ भर नहीं है, अपितु महाभारत के एक प्रमुख महिला पात्र, पांडवों की माता ‘कुंती’ के साथ तात्कालिक समय की …
किताब परिचय: अपराजिता: कुंती की गाथा Read More
राधे की बूढ़ी माँ मंदिर के बाहर ही अपनी दुकान लगाती थी और राधे ताड़ी पीने में ही अपना समय बिता देता था। वृद्धा ने सोचा भी नहीं था मंदिर में राधे के कारण कुछ होगा। फिर कुछ हुआ। क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘विराम चिन्ह’।
लघु-कथा: विराम चिन्ह – जयशंकर प्रसाद Read More
पाठशाला का वार्षिकोत्सव था। मैं भी वहाँ बुलाया गया था। वहाँ के प्रधान अध्यापक का एकमात्र पुत्र, जिसकी अवस्था आठ वर्ष की थी, बड़े लाड़ से नुमाइश में मिस्टर हादी …
लघु-कथा: पाठशाला – चंद्रधर शर्मा गुलेरी Read More