निबंध: उत्साह - आचार्य रामचंद्र शुक्ल

निबंध: उत्साह – आचार्य रामचंद्र शुक्ल

दुःख के वर्ग में जो स्थान भय का है, आनंद वर्ग में वही स्थान उत्साह का है। भय में हम प्रस्तुत कठिन स्थिति के निश्चय से विशेष रूप में दुखी और कभी-कभी स्थिति से अपने को दूर रखने के लिए प्रयत्नवान् भी होते हैं। उत्साह में हम आनेवाली कठिन स्थिति के भीतर साहस के अवसर के निश्चय-द्वारा प्रस्तुत कर्म-सुख की उमंग में अवश्य प्रयत्नवान् भी होते हैं।

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निबंध: साहित्य की महत्ता - महावीर प्रसाद द्विवेदी

निबंध: साहित्य की महत्ता – महावीर प्रसाद द्विवेदी

साहित्य का जीवन और समाज के लिए क्या महत्व है? क्यों साहित्य पढ़ना जरूरी है और किस तरह का साहित्य पढ़ा जाना चाहिए? यह महावीर प्रसाद द्विवेदी ‘साहित्य की महत्ता’ में बताते हैं। आप भी पढ़ें।

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निबंध: जीवन में साहित्य का स्थान - प्रेमचंद

निबंध: जीवन में साहित्य का स्थान – प्रेमचंद

जीवन में साहित्य का स्थान प्रेमचंद का लिखा निबंध है। यह 1932 के हंस के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:

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