छतरपुर: वरिष्ठ कथाकार समीक्षक आभा श्रीवास्तव द्वारा रचित कहानी संग्रह ‘क्षितिज’, काव्य संग्रह ‘मुहूर्त’ एवं साझा संग्रह ‘शगुन’ का गरिमामय विमोचन शहर के जाने-माने होटल पर सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत वंदना कवियित्री इंदू खरे द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। आभा श्रीवास्तव की ओर से सभी मंचासीन व अग्रिम पंक्ति में आसीन साहित्यकारों का शॉल, श्रीफल, पुष्पमाला, और उपहार देकर सम्मानित किया गया। आयोजन वरिष्ठ कवियित्री मालती श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुआ। उन्होंने अत्यंत प्रेरणादायक सुंदर काव्य सृजन कर सुरीले गीत के माध्यम से अपने भाव विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पद्मश्री डॉक्टर अवध किशोर जड़िया ने शब्दों को लयबद्ध शैली में अति साहित्यिक उत्कृष्ट उद्बोधन से सभी को प्रभावित किया व बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न बताते हुए तीनों संग्रह के महत्व को प्रतिपादित किया।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर डॉक्टर गायत्री बाजपेयी ने साहित्य पारखी दृष्टि से प्रेरक विभिन्न प्रसंगों से ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक उद्बोधन दिया व संग्रहों को महत्वपूर्ण बताया। विशिष्ट अतिथि पूर्व आकाशवाणी डायरेक्टर साहित्यकार डॉक्टर रेखा सक्सेना ने भी संग्रहों को समसामयिक बताते हुए उनके महत्व पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कथाकार कवियित्री समीक्षक शोभा शर्मा ने तीनों संग्रह के समस्त बिंदुओं को लेते हुए सारगर्भित उद्बोधन दिया। विशिष्ट अतिथि विमल बुंदेला ने संग्रहों को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रभावी उद्बोधन दिया।
वहीं दिल्ली से आयी हुई कवियित्री डॉक्टर आराधना सिंह ने शानदार वक्तव्य के साथ अपने काव्य संग्रह ‘सीप के मोती’ (प्रकाशक बुक लीफ पब्लिकेशन) सभी उपस्थित साहित्यकारों को भेंट स्वरूप दिया एवं एक प्रेरणादायक रचना सुनाई। इप्टा महासचिव शिवेंद्र शुक्ला, इप्टा सदस्य नीरज खरे ने आभा जी के लेखन को महत्वपूर्ण बताया।
कवियित्री उपन्यासकार डॉ. रेखा सक्सेना, वरिष्ठ रचनाकार विमल बुंदेला, गायत्री बाजपेई, पूर्व प्रोफेसर कवियित्री ऊषा अग्रवाल, कवियित्री विनीता गुप्ता, पुष्पा पाठक, स्मिता जैन, रश्मि पांडेय ने ‘मुहूर्त’ काव्य संग्रह की मनपसंद रचनाओं से तालियाँ बटोरी व उन रचनाओं के महत्व को अभिव्यक्त किया। आकाशवाणी कार्यक्रम अधिकारी रवींद्र प्रजापति जी ने भी आभा श्रीवास्तव की कहानी, कविता, समीक्षा और रूपक की प्रशंसा करते हुए प्रकाशन व प्रसारण पर प्रकाश डाला।
महोबा से आये वरिष्ठ व्यंग्यकार कवि संतोष पटेरिया जी ने अपनी शानदार स्मरण शक्ति का परिचय देते हुए शानदार उद्बोधन में क्षितिज कहानी संग्रह के कुछ प्रसंग और कई रचनाओं की कुछ कंठस्थ पंक्तियों से व पुस्तक में लिखे गए साहित्यकारों की भूमिकाओं के सार संक्षेप (जो उन्हें पंद्रह मिनट पुस्तक देखने के पश्चात ही कंठस्थ हो गये थे) सभी को आश्चर्य चकित कर दिया। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र मे सुधार व उपचार में प्रसिद्धि प्राप्त संजय शर्मा जी ने भी वर्तमान में व्याप्त विसंगतियों के प्रति चिंतन देते हुए रचनाओं को सशक्त ठहराया कि साहित्यकार इसमें विशेष भूमिका निभा सकते हैं। सीताराम साहू ने रचना प्रस्तुत की। युवा रचनाकार नितिन रैकवार ने भी रचना सुना कर मंच को नमन किया। पत्रकार प्रवीण गुप्तजी, वरिष्ठ कवि उदेनियाँ, कवि हरिशंकर जोशी, प्रमोद सारस्वत, शिवसहाय राजपूत ‘साहसी’ ,श्री आर बी पटेल एवं अन्य साहित्यकारों की आयोजन में गरिमामय उपस्थिति रही।
