‘कहानियाँ और करियर’ में अपराध-कथा, लेखन में करियर और ब्रांड रणनीति पर बोले गौरव कुमार निगम

‘कहानियाँ और करियर’ में अपराध-कथा, लेखन में करियर और ब्रांड रणनीति पर बोले गौरव कुमार निगम

लखनऊ, 8 अक्टूबर 2026: राष्ट्रीय पुस्तक मेला, लखनऊ में लेखक एवं ब्रांड रणनीतिकार गौरव कुमार निगम के साथ ‘कहानियाँ और करियर’ विषय पर विशेष साहित्यिक संवाद सत्र आयोजित किया गया। सत्र का संचालन श्री उत्तम सिंह ने किया।

सत्र की शुरूआत में, राष्ट्रीय पुस्तक मेला के संस्थापक श्री मनोज सिंह और लेखक राज वर्मा इत्यादि ने लेखक को पौधा भेंट करके पर्यावरण की रक्षा करने की अवधारणा को पोषित किया।

संवाद में अपराध-कथा लेखन की सम्भावनाओं, कहानी की रचना-प्रक्रिया, लेखन को व्यवसाय के रूप में अपनाने, लेखक की पहचान निर्मित करने तथा कहानी और ब्रांड के बीच सम्बंध जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

पाठक से लेखक बनने की यात्रा

अपने लेखन की शुरुआत के बारे में निगम ने बताया कि उनका लेखन मूलतः उनके गहरे पठन‑अनुभव का विस्तार है।

उनकी कहानी ‘पतंग और पूरियाँ’ को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस सम्मान ने उन्हें लेखन को अधिक गम्भीरता से लेने के लिए प्रेरित किया।

निगम के अनुसार, किसी भी कार्य से सार्थक उपलब्धि प्राप्त करनी हो तो उसे केवल रुचि या शौक के रूप में नहीं, बल्कि जीवन की प्राथमिकता के रूप में स्वीकार करना पड़ता है। उन्होंने नये लेखकों के लिए निरंतर अभ्यास, अनुशासन और अपने लेखन के प्रति गम्भीर प्रतिबद्धता को आवश्यक बताया।

‘स्कैंडल इन लखनऊ’ और लखनऊ के अनेक रूप

इस सत्र के संवाद का प्रमुख आकर्षण निगम का नवीनतम अपराध-कथा उपन्यास ‘स्कैंडल इन लखनऊ’ (Scandal In Lucknow) रहा। लखनऊ जैसे शहर को अपराध-कथा की पृष्ठभूमि बनाने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि लखनऊ अपनी तहज़ीब, नफ़ासत, अदब और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, किंतु उसके जीवन का एक दूसरा पक्ष भी है, जहाँ अपराध, महत्वाकांक्षा, रिश्तों के तनाव, संघर्ष और मानवीय कमजोरियाँ मौजूद हैं। निगम के अनुसार, इन्हीं परस्पर विरोधी रंगों के कारण लखनऊ अपराध-कथा के लिए एक अत्यंत समृद्ध परिवेश प्रस्तुत करता है।

अपराध-कथा और साहित्य की मुख्यधारा

संवाद में अपराध-कथा को साहित्य की मुख्यधारा से अलग अथवा कमतर मानने की धारणा पर भी चर्चा हुई। निगम ने इस दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाते हुए अगाथा क्रिस्टी (Agatha Christie), सर आर्थर कॉनन डॉयल (Sir Arthur Conan Doyle) और देवकी नंदन खत्री (Devaki Nandan Khatri) जैसे रचनाकारों का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि लोकप्रियता और साहित्यिक महत्त्व परस्पर विरोधी नहीं हैं। एरक्यूलि प्वहरो (Hercule Poirot) और शरलॉक होम्स (Sherlock Holmes) जैसे काल्पनिक पात्र साहित्य की सीमाओं से बाहर निकलकर विश्वव्यापी सांस्कृतिक प्रतीक बन चुके हैं।

निगम के अनुसार, अपराध-कथा ने केवल पाठकों का मनोरंजन नहीं किया, बल्कि समाज में अपराध, जाँच, प्रमाण और सत्य की खोज को लेकर हमारी कल्पना को भी प्रभावित किया है। इसने अपराध विश्लेषण और नियंत्रण के लिए फॉरेंसिक साइंस जैसी आधुनिक और वैज्ञानिक व्यवस्था को स्थापित करने में मदद की है।

इसलिए अपराध-कथा को केवल अपराध की घटनाओं का वर्णन मानना उसकी साहित्यिक और सामाजिक भूमिका को सीमित करके देखना होगा।

क्या लेखन आजीविका बन सकता है?

‘कहानियाँ और करियर’ का एक महत्वपूर्ण पक्ष लेखन को पूर्णकालिक पेशे के रूप में अपनाने की सम्भावनाओं पर केंद्रित रहा।

निगम ने कहा कि लेखन को केवल शौक समझने की धारणा बदलने की आवश्यकता है। आज लेखक के लिए पाम्परिक प्रकाशन के अतिरिक्त स्व-प्रकाशन, पटकथा लेखन, डिजिटल लेखन, लेखक की सार्वजनिक पहचान का निर्माण, कार्यशालाएँ, व्याख्यान और विभिन्न डिजिटल माध्यमों के ज़रिए आय के अनेक अवसर उपलब्ध हैं।

हालाँकि, उनके अनुसार केवल अच्छा लिखना पर्याप्त नहीं है। एक स्थायी लेखकीय करियर के लिए लेखक को पाठकों, प्रकाशन-जगत, अपनी पहचान, सम्प्रेषण और बाज़ार की प्रकृति को भी समझना होगा।

सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और लेखन के भविष्य पर भी चर्चा हुई। लेखकों के लिए AI को सम्भावित खतरे के रूप में देखने के बजाय निगम ने इसे एक उपयोगी रचनात्मक और पेशेवर उपकरण के रूप में देखने की बात कही। उनके अनुसार, AI लेखक की कल्पना, अनुभव और मानवीय संवेदना का विकल्प नहीं है, लेकिन शोध, विचार-विस्तार, सम्पादन, संरचना, भाषा-सम्बंधी कार्य और रचनात्मक प्रयोगों में यह लेखक की कार्यक्षमता बढ़ा सकता है।

निगम ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक का उपयोग लेखक की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि लेखक की क्षमताओं को विस्तार देने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत किया कि AI के दौर में मौलिक विचार, अनुभव और लेखक की विशिष्ट आवाज का महत्व और बढ़ेगा।

‘कहानियाँ और करियर’ संवाद सत्र में चर्चा का व्यापक निष्कर्ष यही रहा कि लेखक केवल कहानियाँ लिखने वाला व्यक्ति नहीं होता; वह अपने समय, समाज और मनुष्य को देखने की एक विशिष्ट दृष्टि भी विकसित करता है।

इस विशेष साहित्यिक संवाद सत्र में अनूप कुमार, राज वर्मा, भगवती सिंह, सौरभ निगम, पंकज पांडेय, मृगांक श्रीवास्तव जैसे लेखकों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति बनी रही।


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