पुस्तक टिप्पणी: चिकन चिकन – आर एल स्टाइन | गूज़बम्पस 53

चिकन चिकन - आर एल स्टाइन | गूज़बम्पस 53
कहानी

12 वर्षीय क्रिस्टल और 10 वर्षीय कोल को उनके माता-पिता शहर की भाग दौड़ भरी जिंदगी से बचाने के लिए एक छोटे से कस्बे गोशन फ़ॉल्स (Goshen Falls) में ले आए थे।

यहाँ की ज़िंदगी धीमी थी। हर कोई हर किसी को जानता था।

वैनेसा भी इसी कस्बे में रहती थी और उसके विषय में अलग अलग तरह की अफवाहे कस्बे के लोगों के बीच में फैली हुई थी। कस्बे के बच्चों की माने तो वो जादू टोना करती थी और उसने कई बच्चों को जादू टोने से इतना बदल दिया था कि उन्हें यह जगह छोड़कर ही जाना पड़ा था।

पर इन अफवाहों के बावजूद बच्चे वैनेसा को अपनी शरारत का शिकार बनाना नहीं भूलते थे।

कोल को यह बातें अंधविश्वास लगती थी और इसलिए वो भी वैनेसा को अपनी शरारतों से परेशान करने में कोई बुराई नहीं मानता था।

पर क्या बातें केवल अंधविश्वास थीं?

क्रिस्टल और कोल इन अफवाहों की सच्चाई जल्द ही जानने वाले थे।

टिप्पणी

‘चिकन चिकन’ आर एल स्टाइन की गूज़बम्पस शृंखला का 53 वाँ उपन्यास है। उपन्यास 1997 में प्रथम बार प्रकाशित हुआ था।

कहानी के केंद्र में दो मुख्य पात्र हैं— क्रिस्टल और कोल। बारह वर्षीय क्रिस्टल और दस वर्षीय कोल भाई बहन हैं जो कि अपने माता पिता के साथ गोशन फ़ॉल्स नामक कस्बे में रहते हैं। कहानी की कथावाचक क्रिस्टल ही है और इसलिए हम उसके दृष्टिकोण से इस कहानी से रूबरू होते हैं।

क्रिस्टल बड़ी बहन है और उस हिसाब से परिपक्व है। उसे कस्बाई जीवन तो पसंद है लेकिन जो उसके माता-पिता ने घर में जो मुर्गी पालन किया है वो पसंद नहीं है। वो अपना काम सही से करती है और माता-पिता की जिम्मेदार बेटी है।

वहीं दूसरी तरह कोल क्रिस्टल से छोटा है और शरारती है। जब वो अपनी बहन को परेशान करने के लिए नई खुराफातें नहीं सोच रहा होता है तो दोस्तो के साथ नयी खुराफातें करने की सोचता रहता है। उसकी ऐसी ही एक खुराफात के चलते क्रिस्टल और वो वैनेसा, जिसे कस्बे के बच्चे जादू टोना करने वाली भी मानते हैं, के समक्ष आ जाते हैं।

इन दोनों के अतिरिक्त एंथनी, फ्रैनी जोवेट, जेरेमी गार्थ और लूसी एन भी कहानी के पात्र हैं। एंथनी, फ्रेनी और जेरेमी कोल के दोस्त हैं और लूसी एन क्रिस्टल की करीबी दोस्त है।

एंथनी कोल का खास दोस्त है और उसके साथ मस्ती तो करता है लेकिन शरारत एक हद तक ही करता है।

बच्चे कैसे दोस्तों के दबाव में आके वो कार्य भी करने को तैयार हो जाते हैं जिन्हें करने का उनका मन नहीं होता यह लेखक ने कोल और एंथनी के दोस्तों फ्रैनी जोवेट और जेरेमी गार्थ वाले प्रकरण से बखूबी दर्शाया है।

कथानक में बच्चों के अलावा इनके माता-पिता भी हैं। पेशे से ये सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर है पर कथानक में इनके पेशे से जुड़ी कोई चीज दिखती नहीं है। अगर दिखती तो अच्छा होता। इसके अतिरिक्त ये अपने और अपनी ज़िंदगी में खोए हुए लोग अधिक प्रतीत होते हैं। ये लोग शहर की जिंदगी से त्रस्त होकर इस कस्बे में आए थे ताकि ज़िंदगी थोड़ी धीमी हो पर अभी भी इनके बच्चों के क्या बीत रही होती है ये इन्हें दिखता नहीं है। बच्चे बार बार इन्हें कुछ बताने की कोशिश करते हैं लेकिन वो उनकी बात पर कान नहीं धरते हैं। यह मुझे थोड़ा खटका। अगर बात कहने की कोशिश कोल कर रहा होता तो उनका नज़रंदाज़ करना समझ भी आता पर क्रिस्टल को भी दोनों द्वारा यूँ नज़रंदाज़ करना खला।

कहानी में वैनेसा का भी महत्वपूर्ण भूमिका है। वह एक अतरंगी झक्की सी महिला है। ऐसी महिला के पास अगर जादुई ताकत आ जाए तो वो कैसे उसका इस्तेमाल करेगी यह इधर दिखता है। कहानी का अंत इसे अच्छे से रेखांकित करता है।

यह सभी चरित्र कहानी के अनुरूप गढ़े गए हैं।

कथानक की बात करूँ तो सत्ताईस अध्यायों और 112 पृष्ठों में फैला कथानक चुस्त है। अध्याय ऐसे खत्म किए गए हैं कि वो अगले अध्याय को पढ़ने की उत्सुकता जागृत करते हैं। भाषा सरल है और इसमें रवानगी है। कहानी में हास्य है और लेखक ने घुमाव भी कथानक में दिए हैं। यह घुमाव कथानक में रोमांच बनाए रखते हैं। विशेषकर बच्चों द्वारा आखिरी के हिस्से में अपनी मुसीबत से बचने के लिए वैनेसा के घर जाने पर वहाँ होने वाला घटनाक्रम ऐसा है कि जब वो प्रसंग शुरू होता है तो आप उपन्यास खत्म करके ही दम लेते हैं। चूँकि ये हॉरर उपन्यास है तो हॉरर के तत्व भी इसमें मौजूद है। ये तत्व कहानी की शुरुआत से लेकर अंत तक बने रहते हैं। कभी मज़ाक के रूप में और कभी असल अनुभवों के रूप में। बच्चे जिन असल अनुभवों से इस उपन्यास में गुज़रते हैं उनकी कल्पना करना भी भयावह हैं।

आर एल स्टाइन के उपन्यास अक्सर हल्के फुल्के होते है। इसमें भी अधिकतर हँसी मजाक रहता है लेकिन आखिर में आकर उपन्यास ऐसा हो जाता है कि आपको बेचारे बच्चों के लिए दुख होने लगता है। विशेषकर क्रिस्टल के लिए क्योंकि वो कोल के मुकाबले तो शरीफ थी। सच कहूँ कहानी पढ़ते हुए तो ऐसा लगता है जैसे कोल क्रिस्टल के मुकाबले बड़े सस्ते में छूटा। वहीं क्रिस्टल चूँकि बड़ी थी तो उसे कोल के कृत्यों की सज़ा भी मिली।

अंत में यही कहूंगा कि चिकन चिकन एक पठनीय उपन्यास है जो एक बार शुरुआत करने पर खुद को पूरा पढ़वा ले जाता है। नहीं पढ़ा है तो पढ़कर देखिएगा। घर में बच्चे हैं तो वह भी इसे पढ़ सकते हैं।

पुस्तक विवरण:

प्रकाशक: स्कोलेस्टिक | शृंखला: गूज़बम्पस #53 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | भाषा: अंग्रेजी


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Author

  • विकास नैनवाल

    विकास नैनवाल शिक्षा मूलतः पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड से आते हैं और फिलहाल गुरुग्राम में वक्त गुजार रहे हैं।

    किस्से कहानियाँ पढ़ने और गढ़ने का शौक है। अच्छी कहानियों को अनुवाद के माध्यम से हिंदी पाठकों के बीच लाने को भी वो लालायित रहते हैं। वह लेखन और अनुवाद के अतिरिक्त सम्पादन कार्य भी करते हैं। कई प्रकाशनों के लिए उन्होंने फ्री लांस सम्पादन का कार्य भी किया है।

    उनकी कई रचनाएँ और अनुवाद पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

    वह एक बुक जर्नल नाम से यह वेब पत्रिका और दुईबात नाम से वह अपनी व्यक्तिगत वेबसाइट का संचालन भी करते हैं।

    पुस्तकें:
    रचना संकलन: एक शाम तथा अन्य रचनाएँ
    बाल साहित्य: 'इशिता की सूझबूझ' (सचित्र बाल कथा)
    अनुवाद: नेवर गो बैक, चाल पे चाल, 'फैटल फॉलाउट: एक गलती, घातक परिणाम'

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