नई दिल्ली, 29 मार्च:
श्री सांता नंद मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक ‘गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती’ का भव्य लोकार्पण समारोह जेएनयू कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। पुस्तक को साहित्य विमर्श प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।
इस अवसर पर शिक्षाविदों, साहित्य प्रेमियों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण उत्सव बन गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारम्परिक मंगलाचरण से हुई, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. मुरली पाठक, कुलपति, लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ तथा प्रो. सुधीर प्रताप सिंह, प्रोफेसर, जेएनयू की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने अपने विचारों से कार्यक्रम को समृद्ध किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पुस्तक का विधिवत लोकार्पण रहा, जिसे उपस्थित जनों ने अत्यंत सराहा। ‘गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती’ पुस्तक में लेखक ने अपनी जड़ों, संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जुड़े भावनात्मक सम्बंधों को अत्यंत संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया है। वहीं एक गाँव के युवक की अमेरिका तक की यात्रा और वहाँ उपजे अनुभवों को भी लेखक द्वारा दर्शाया गया है।
अपने सम्बोधन में लेखक श्री सांता मिश्र ने पुस्तक लेखन की प्रेरणा एवं अपनी यात्रा साझा करते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने के महत्व पर प्रकाश डाला।
लेखक के परिवारजनों ने भी अपने भावपूर्ण विचार व्यक्त किए, जिससे कार्यक्रम में आत्मीयता का भाव और गहरा हुआ। उपस्थित अतिथियों ने भी पुस्तक की विषयवस्तु की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों के लिए मॉकटेल एवं भोज का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं प्रभावी संचालन के साथ संपन्न हुआ, जिसने सभी उपस्थित जनों पर एक स्थायी छाप छोड़ी।
