दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही यानी जुलाई से सितम्बर के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों की सूची जारी की जा चुकी है। कथा, कथेतर, अनुवाद और कविता श्रेणी में यह सूची जारी की गयी है। कथा श्रेणी में जिन पुस्तकों ने जगह बनाई है वह निम्न हैं:
यार पापा – दिव्य प्रकाश दुबे

पुस्तक विवरण:
हारे हुए केस जीतना मनोज साल्वे की आदत ही नहीं शौक़ भी था। जब वह कोर्ट में दलील देने के लिए उठता तो जज भी अपनी कुर्सी पर पीठ सीधी करके बैठता। देश की लगभग सभी मैगज़ीन के कवर पर उसकी फ़ोटो आ चुकी थी। देश के सौ सबसे धारदार व्यक्तियों की सूची में उसका नाम पिछले दस साल से हिला नहीं था। देश का बड़े-से-बड़ा अभिनेता, नेता और बिज़नेसमैन सभी मनोज साल्वे के या तो दोस्त थे या होना चाहते थे। मनोज के बारे में कहा जाता था कि पिछले कुछ सालों में कोई भी उससे बड़ा वकील नहीं हुआ। ऐसे में जब लग रहा था कि मनोज के साथ कुछ ग़लत नहीं हो सकता है, ख़बर आती है कि मनोज की लॉ की डिग्री फ़ेक है। इस ख़बर को वह झुठला नहीं पाता। वो आदमी जो हर केस जीत सकता था, वह अपनी बेटी की नज़र में क्यों सबसे बुरा इंसान था? ऐसा क्या था कि उसकी बेटी साशा उससे बात नहीं कर रही थी? क्या मनोज अपनी पर्सनल लाइफ़, अपने करियर को फिर से पटरी पर ला पाएगा?
प्रकाशक: हिन्द युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
चांदपुर की चंदा – अतुल कुमार राय

पुस्तक विवरण:
कुछ साल पहले पिंकी और मंटू का प्रेम-पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और ऐसे वायरल हुआ कि उसे शेयर करने वालों में हाईस्कूल-इंटरमीडिएट के छात्र भी थे और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भी। लेकिन उस छोटे से प्रेम-पत्र के पीछे की बड़ी कहानी क्या थी, यह किसी को नहीं मालूम। क्या था उन दो प्रेमियों का संघर्ष? ‘चाँदपुर की चंदा’ क्या उस मंटू और पिंकी की रोमांटिक प्रेम-कहानी भर है? नहीं, यह उपन्यास बस एक खूबसूरत, मर्मस्पर्शी वायरल प्रेम-कहानी भर नहीं है, बल्कि यह हमारे समय और हमारे समाज के कई कड़वे सवालों से टकराते हुए, हमारी ग्रामीण संस्कृति की विलुप्त होती वो झाँकी है, जो पन्ने-दर-पन्ने एक ऐसे महावृत्तांत का रूप धारण कर लेती है जिसमें हम डूबते चले जाते हैं और हँसते, गाते, रोते और मुस्कुराते हुए महसूस करते हैं। यह कहानी न सिर्फ़ हमारे अपने गाँव, गली और मोहल्ले की है, बल्कि यह कहानी हमारे समय और समाज की सबसे जरूरी कहानी भी है।
प्रकाशक: हिन्द युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
वो कौन थी: इतिहास के पन्नों में छिपे राज़ – रूपा श्रीकुमार

पुस्तक विवरण:
एक साधारण सा रोमांचक सफर, तब एक खौफनाक मोड़ ले लेता है जब वे एक प्राचीन और गुप्त जगह पर पहुँचते हैं। वहाँ से शुरू होती है अजीब घटनाओं की एक शृंखला—एक अदृश्य साया, एक अनजानी शक्ति, और ऐसा डर जिसे न विज्ञान समझा सकता है और न ही तर्क। क्या यह सब सिर्फ एक मानसिक भ्रम है, या वाकई कोई साया उनका पीछा कर रहा है?
प्रकाशक: प्रकाश बुक्स | पुस्तक लिंक: अमेज़न
फिर मिलोगी – मधु चतुर्वेदी

पुस्तक विवरण:
‘फिर मिलोगी’ सिर्फ़ एक प्रेम कहानी नहीं है, यह उस अनकहे मोह का आख्यान है जो जीवन की भीड़ में खोकर भी स्मृतियों में जीवित रहता है। वसुधा की शादीशुदा ज़िंदगी में सूनापन है, लेकिन उसका दिल एक ऐसे एहसास में उलझा है जो बरसों पहले किसी ट्रेन यात्रा में मिला था—एक ऐसा संयोग जो कल्पना-सी प्रतीत होता है, लेकिन दिल से मिटता नहीं।
मधु चतुर्वेदी की लेखनी संवेदना, सौंदर्य और स्त्री-मन की महीन परतों को गहराई से उकेरती है। उपन्यास भाषा में बहता है, दृश्य रचता है और पाठक के भीतर एक हूक छोड़ जाता है। यह किताब उन सबके लिए है जिन्होंने कभी किसी को खोया है, लेकिन भुला नहीं पाए।
प्रकाशक: हिंद युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
यूपीएससी वाला लव – कलेक्टर साहिबा 2- कैलाश मांजू बिश्नोई

पुस्तक विवरण:
जहाँ पहले भाग में, एंजल और गिरीश का प्रेम चरम पर पहुँचा था, वहीं दूसरे भाग में, एंजल IAS बनने के बाद करियर और प्यार के बीच उलझ जाती है और उसे सच्चे दिल से चाहने वाला गिरीश, आत्म-सम्मान और भावनाओं के बीच फंस जाता है। क्या एंजल ने अपने सपनों की ख़ातिर, अपने प्यार गिरीश को ही छोड़ दिया या उनके प्रेम ने समय की इस परीक्षा को पार किया? इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए पढ़ें उपन्यास, कलेक्टर साहिबा का यह दूसरा भाग। कलेक्टर साहिबा – 2 में एंजल और गिरीश के दृष्टिकोण से रिश्तों की पेचीदगियों और महत्त्वाकांक्षाओं के टकराव को दिखाया गया है। यह उपन्यास प्रेम, करियर और आत्म-सम्मान के ऊहापोह को ख़ूबसूरती से बुनता है; साथ ही, पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या प्यार और करियर एक साथ निभाए जा सकते हैं या किसी एक की बलि चढ़ानी ही पड़ती है।
प्रकाशक: मंजुल पब्लिशिंग हाउस | पुस्तक लिंक: अमेज़न
कॉफी के कप में चाय

पुस्तक विवरण:
एक लेखक, जिसे यात्राएँ और लेखन लगातार अपनों से दूर ले जाते रहे हैं, पिता की मृत्यु के वर्षों बाद एक दृश्य उसे स्मृतियों की उन परतों तक वापस ले जाता है, जिन्हें वह शायद भूल जाना चाहता था। वहीं से खुलते हैं पिता के अनकहे रिश्ते, रूमिका की उपस्थिति और उसके अपने जीवन के वे हिस्से, जिनसे बचते हुए वह मुंबई से कश्मीर और फिर यूरोप तक भटकता है।
‘कॉफ़ी के कप में चाय’ स्मृति, परिवार, अकेलेपन, अपराधबोध और उन रिश्तों का संवेदनशील उपन्यास है जिन्हें कोई आसान नाम नहीं दिया जा सकता। इसमें यात्रा केवल जगहों की नहीं, अपने अतीत और भीतर की उलझनों तक लौटने की भी है। और कॉफ़ी के कप में मिली चाय की तरह, कभी-कभी पराई दुनिया में अचानक मिला अपनापन ही सबसे बड़ी राहत बन जाता है।
प्रकाशक: हिंद युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
मौत बुलाती है – सत्य व्यास

पुस्तक विवरण:
हुसैनगंज पुलिस को क्रिस्तानी कब्रिस्तान के बाहर एक लाश मिली है और रेलवे पुलिस को मंडावली रेलवे ट्रैक पर दूसरी लाश। क़ातिल आला दर्जे का शातिर है। वह दो अलग-अलग दायरे में काम करनेवाली पुलिस को आपस में उलझा देता है। और समस्या केवल यही नहीं है। यह भी है कि एक लाश के साथ तीन हाथ है। कौन मजलूम है और कौन मुजरिम। कौन मक़तूल है और कौन क़ातिल। अगर आप यह केस इंस्पेक्टर नकुल से पहले सुलझा पाते हैं तो सबसे पहले अपने दिमाग को ही शक के दायरे में खड़ा करें। क्योंकि फिर आप भी क़ातिल की तरह ही सोचते हैं।
प्रकाशक: युवान बुक्स | पुस्तक लिंक: अमेज़न
तुम्हारी औकात क्या है – पीयूष मिश्रा

पुस्तक विवरण:
यह पियूष मिश्रा की आत्मकथा है जिसे उन्होंने उपन्यास की तर्ज पर लिखा है। और लिखा नहीं; जैसे शब्दों को चित्रों के रूप में आँका है। इसमें सब कुछ उतना ही ‘परफ़ेक्ट’ है जितने बतौर अभिनेता वे स्वयं। न अतिरिक्त कोई शब्द, न कोई ऐसा वाक्य जो उस दृश्य को और सजीव न करता हो। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ‘अनयूजुअल’—से परिवार में जन्मा एक बच्चा चरण-दर-चरण अपने भीतर छिपी असाधारणता का अन्वेषण करता है; और क़स्बाई मध्यवर्गीयता की कुंठित और करुण बाधाओं को पार करते हुए धीरे-धीरे अपने भीतर के कलाकार के सामने आ खड़ा होता है। अपने आत्म के सम्मुख जिससे उसे ताज़िन्दगी जूझना है; अपने उन डरों के समक्ष जिनसे डरना उतना ज़रूरी नहीं, जितना उन्हें समझना है। इस आत्मकथात्मक उपन्यास का नायक हैमलेट, यानी संताप त्रिवेदी यानी पीयूष मिश्रा यह काम अपनी ख़ुद की कीमत पर करता है। यह आत्मकथा जितनी बाहर की कहानी बताती है—ग्वालियर, दिल्ली, एनएसडी, मुम्बई, साथी कलाकारों आदि की—उससे ज़्यादा भीतर की कहानी बताती है, जिसे ऐसी गोचर दृश्यावली में पिरोया गया जो कभी-कभी ही हो पाता है। इसमें हम दिल्ली के थिएटर जगत, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और मुम्बई की फ़िल्मी दुनिया के कई सुखद-दुखद पहलुओं को देखते हैं; एक अभिनेता के निर्माण की आन्तरिक यात्रा को भी। और एक संवेदनशील रचनात्मक मानस के भटकावों-विचलनों-आशंकाओं को भी। लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि इस किताब की इसका गद्य है। पीयूष मिश्रा की कहन यहाँ अपने उरूज़ पर है। पठनीयता के लगातार संकरे होते हिन्दी परिसर में यह गद्य खिली धूप-सा महसूस होता है।
प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन | पुस्तक लिंक: अमेज़न
सरकारी चाय के लिए – प्रेम शंकर चरड़ाना

पुस्तक विवरण
सरकारी चाय के लिए प्रेम शंकर चरड़ाना का पहला उपन्यास है — जो उन युवाओं की दुनिया में झाँकता है जो सरकारी नौकरी की तैयारी में अपने घरों से दूर शहरों में संघर्ष कर रहे हैं। यह कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि उस पूरे जीवन की है जिसमें किराए के कमरे होते हैं, कटती हुई तन्हा शामें होती हैं, टपकती छतों के नीचे रखे सपने होते हैं, और चाय के कप के साथ बनने वाले रिश्ते होते हैं। लेखक ने बहुत सादगी से उस सच्चाई को लिखा है जो हर प्रतियोगी छात्र के जीवन का हिस्सा बन जाती है — कोचिंग की भागदौड़, बार-बार की असफलताएँ, उम्मीदों का बोझ, और फिर भी हिम्मत न हारने वाला जज़्बा।
प्रकाशक: पंक्ति प्रकाशन | पुस्तक लिंक: अमेज़न
यूपीएससी वाला लव – कैलाश मांजू बिश्नोई

पुस्तक विवरण:
इस उपन्यास की मुख्य किरदार एक आईएएस अधिकारी एंजल है। इस रचना के माध्यम से एंजल की जिजीविषा और संघर्ष के धागों से बुनी हुई कहानी को प्रस्तुत करने के साथ-साथ उसके आईएएस में चयनित हो जाने के बाद मसूरी के लबासना ट्रेनिंग माहौल को भी चित्रित करने की कोशिश की गई है। शुरुआती अध्यायों में सिविल सेवा की तैयारी करने वाले चार अभ्यर्थियों के यारी दोस्ती के किस्से हैं। यह उपन्यास भारत के हर उस नवयुवक की कहानी है जो बड़े सपने देखता है और समाज और दोस्तों के ताने सुनकर भी अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहता है। साथ ही कोरोना काल में प्रतियोगी छात्रों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, उसका भी चित्रण किया है। इसके अलावा इस रचना के माध्यम से प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। इस कृति की लव स्टोरी छोटे शहरों की छोटी सोच से लड़ने की स्टोरी है। यह प्यार और आईएएस कैडर में से किसी एक को चुनने से जुड़ी हुई एक रोचक कहानी है। पैसा, पद, पावर, सामाजिक स्टेटस से ज्यादा अपने प्रेम को अहमियत देकर गिरीश और एंजल ने सामाजिक बंदिशों की छाया अपने रिश्ते पर नहीं पड़ने दी तथा हमेशा एक-दूसरे की ताकत बन खड़े रहे और आखिरकार एक दूसरे के हो गए। एक तरह से पूरी कहानी में मोहब्बत की सौंधी खुशबू बसी है।
प्रकाशक: मंजुल पब्लिशिंग हाउस | पुस्तक लिंक: अमेज़न
वह पुस्तकें जिन्होंने विस्तृत सूची में जगह बनायी:
- लपूझन्ना – अशोक पांडे | प्रकाशक: हिंद युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
- कसारी मसारी – मनोज राजन त्रिपाठी | प्रकाशक: एका | पुस्तक लिंक: अमेज़न
- चाय मुबारक – नरेन रघुवंशी | प्रकाशक: राइटर्स पॉकेट | पुस्तक लिंक: अमेज़न
- पतझड़ – मानव कौल | प्रकाशक: हिंद युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
- द फिक्शनल मैन – निधि कौशिक | प्रकाशक: प्रभात प्रकाशन | पुस्तक लिंक: अमेज़न
- संयम – मानव कौल | प्रकाशक: हिंद युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
- 3 मुलाकातें और कुछ कहानियाँ – याह्या बूटवाला | प्रकाशक: अनबाउंड स्क्रिप्ट | पुस्तक लिंक: अमेज़न
- ऑलमोस्ट प्यार – दिव्य प्रकाश दुबे | प्रकाशक: हिंद युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
- विश्वगुरु – नीलोत्पल मृणाल | प्रकाशक: हिन्द युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
- किसी अजनबी के प्यार में – रेणु मिश्रा | प्रकाशक: हिंद युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
