कहानी: मछुए की बेटी – सुभद्रा कुमारी चौहान
तिन्नी को उसके मछुआरे माता-पिता ने बड़े लाड़ से पाला था। यही कारण था कि वह बड़ी निडर हो गयी थी और अपनी मर्ज़ी का काम किया करती थी। उन दिनों राजा साहब के बेटे कृष्णदेव की नज़र तिन्नी पर पड़ी तो वह उसे देखते ही रह गये। आगे क्या हुआ ये जानने के लिए पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी कहानी ‘मछुए की बेटी’।
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