कहानी: माँ बेटे - भुवनेश्वर

कहानी: माँ-बेटे – भुवनेश्वर

एक माँ अपने आखिरी समय के नज़दीक है। उसका पूरा परिवार उसके इर्द-गिर्द मौजूद है। भुवनेश्वर की यह कहानी इसी समय को दर्शा रही है। अपने आखिरी समय में माँ के भीतर चल रहे विचारों और संतानों की अलग-अलग प्रतिक्रिया को लेकर उन्होंने यह कहानी बुनी है। यह कहानी पहली बार हंस के वर्ष 1937 के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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कहानी: सूर्यपूजा - भुवनेश्वर

कहानी: सूर्यपूजा – भुवनेश्वर

विलास डॉक्टर से दुनिया छोड़ने की बात कर रहा है। वह ऐसा क्यों कर रहा है?
आप भी पढ़ें लेखक भुवनेश्वर की कहानी ‘सूर्यपूजा’:

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हिंदी कहानी: भेड़िये - भुवनेश्वर

कहानी: भेड़िये – भुवनेश्वर

‘भेड़िये’ भुवनेश्वर की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। यह कहानी 1938 में हंस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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कहानी: मौसी - भुवनेश्वर

कहानी: मौसी – भुवनेश्वर

लोग समझते थे कि बिब्बो हमेशा से ही अकेली रहती आयी है, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। पर अब बिब्बो ने अपने एकाकीपन से समझोता कर लिया था। इतने समय बाद फिर एक बार उसका एकाकीपन टूटने को था। आखिर ऐसा क्या हुआ था? जानने के लिए पढ़ें भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव की कहानी ‘मौसी’।

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लघु-कथा: लड़ाई - भुवनेश्वर

लघु-कथा: लड़ाई – भुवनेश्वर

‘लड़ाई’ भुवनेश्वर की लिखी लघु-कथा है। यह रचना हंस पत्रिका के वर्ष 1939 के सितम्बर में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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कहानी: जीवन की झलक - भुवनेश्वर

कहानी: जीवन की झलक – भुवनेश्वर

कथावाचक का अंतिम समय निकट है। ऐसे में वह और उसकी पत्नी उसके जीवन की एक झलक पाठकों के समक्ष रखना चाहते हैं। आप भी पढ़ें भुवनेश्वर की कहानी ‘जीवन की झलक’

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कहानी: मास्टरनी - भुवनेश्वर

कहानी: मास्टरनी – भुवनेश्वर

‘मास्टरनी’ भुवनेश्वर की लिखी कथा है। यह कथा मई 1938 में ‘चक्कलस’ में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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