कहानी: भेड़िये – भुवनेश्वर
‘भेड़िये’ भुवनेश्वर की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। यह कहानी 1938 में हंस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:
कहानी: भेड़िये – भुवनेश्वर Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
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लोग समझते थे कि बिब्बो हमेशा से ही अकेली रहती आयी है, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। पर अब बिब्बो ने अपने एकाकीपन से समझोता कर लिया था। इतने समय बाद फिर एक बार उसका एकाकीपन टूटने को था। आखिर ऐसा क्या हुआ था? जानने के लिए पढ़ें भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव की कहानी ‘मौसी’।
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‘लड़ाई’ भुवनेश्वर की लिखी लघु-कथा है। यह रचना हंस पत्रिका के वर्ष 1939 के सितम्बर में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: लड़ाई – भुवनेश्वर Read More
कथावाचक का अंतिम समय निकट है। ऐसे में वह और उसकी पत्नी उसके जीवन की एक झलक पाठकों के समक्ष रखना चाहते हैं। आप भी पढ़ें भुवनेश्वर की कहानी ‘जीवन की झलक’
कहानी: जीवन की झलक – भुवनेश्वर Read More
‘मास्टरनी’ भुवनेश्वर की लिखी कथा है। यह कथा मई 1938 में ‘चक्कलस’ में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:
कहानी: मास्टरनी – भुवनेश्वर Read More