रैना उवाच: लेखक और उनके लेखकीय ‘टेल’

गजानन रैना जब लिखते है अनूठा लिखते हैं। साहित्य को देखने की उनकी अपनी एक नजर है। आज उन्होंने लेखकीय टेल पर कुछ लिखा है। आप भी पढ़ें:

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रैना उवाच: खरीदी कौड़ियों के मोल

गजानन रैना  सोशल मीडिया में रैना उवाच के नाम से अपने ख़ास अंदाज में अलग अलग विषयों पर अपनी टीप को प्रकाशित करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल में पढ़िए बिमल मित्र के उपन्यास ‘खरीदी कौड़ियों के मोल’ पर लिखी गयी उनकी पाठकीय टिप्पणी। 

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रैना उवाच: कविता

गजानन रैना  सोशल मीडिया में रैना उवाच के नाम से अपने ख़ास अंदाज में अलग अलग विषयों पर अपनी टीप को प्रकाशित करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल में पढ़िए कविता के ऊपर लिखी उनकी ये टिप्पणी।

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रैना उवाच: आवारा मसीहा की छवि और सामाजिक स्वीकृति की चाहत के बीच की खींचतान का नतीजा है अंतिम परिचय

गजानन रैना  सोशल मीडिया में रैना उवाच के नाम से अपने ख़ास अंदाज में अलग अलग विषयों पर अपनी टीप को प्रकाशित करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल में पढ़िए शरत चन्द्र चट्टोपाध्य के उपन्यास अंतिम परिचय पर लिखी गयी उनकी पाठकीय टिप्पणी। 

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गजानन रैना

रैना उवाच: दो पसंदीदा कहानियाँ – स्मृतियाँ और तदुपरांत

गजानन रैना साहित्यानुरागी है और साहित्य के अलग अलग पहलुओं  और साहित्यिक कृतियों पर बात करने का उनका अपना अलग अंदाज है। रैना उवाच के नाम से वह यह टिप्पणियाँ अपने सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं।  आज हम आपके लिए ऐसा ही एक रैना उवाच ला रहे हैं जिसमें वह अपनी दो पसंदीदा कहानियों पर बात कर रहे हैं।

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