कहानी: तीन देवता - महवीर प्रसाद द्विवेदी

कहानी: तीन देवता – महावीर प्रसाद द्विवेदी

वररुचि एक ब्राह्मण था जिसकी पत्नी उपकोशा अद्वितीय सुंदरी थी। जब वररुचि को तप के लिए हिमालय पर जाना पड़ा तो उसके वहाँ न होने पर उपकोशा के साथ जो घटना घटी वही वह यहाँ पाठकों को सुना रहा है। पढ़ें महावीर प्रसाद द्विवेदी की यह कहानी ‘तीन देवता’।

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लेखक विनोद कुमार शुक्ल की नवीन पुस्तक हुई रिलीज

लेखक विनोद कुमार शुक्ल की नयी किताब हुई रिलीज

लेखक विनोद कुमार शुक्ल की नवीन पुस्तक हिंद युग्म प्रकाशन द्वारा प्रकाशित होकर आ गयी है।। पुस्तक का लोकार्पण हालिया समाप्त हुए हिंद युग्म उत्सव में हुआ था। पढे विस्तृत खबर:

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कहानी: कम्युनिस्ट सभा - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: कम्युनिस्ट सभा – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

‘कम्युनिस्ट सभा’ विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की लिखी कहानी है। यह कहानी उनके कहानी संग्रह ‘रक्षा बंधन तथा अन्य कहानियाँ’ में संकलित हुई थी। इस कहानी में उन्होंने मुख्यतः कम्युनिस्टों को अपने व्यंग्यबाण के निशाने में लिया है। आप भी पढ़ें:

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कहानी: डॉक्टर साहब की घड़ी - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: डॉक्टर साहब की घड़ी – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

डॉक्टर वेदी रियायत के जाने माने डॉक्टर थे। जितना रियासत में उनका नाम था उतना ही उनकी घड़ी का भी नाम था। आखिर कैसी घड़ी थी ये और उसका इतना नाम क्यों था? पढ़ें आचार्य चतुरसेन की कहानी ‘डॉक्टर साहब की घड़ी’:

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निबंध: सरस्वती का प्रकाशन - राहुल सांकृत्यायन

निबंध: सरस्वती का प्रकाशन – राहुल सांकृत्यायन

‘सरस्वती’ महावीर प्रसाद द्विवेदी के सम्पादन में प्रकाशित होने वाली पत्रिका थी। यह हिंदी की पहली मासिक पत्रिका थी। हिंदी के प्रचार प्रसार में इस पत्रिका और महावीर प्रसाद द्विवेदी का क्या योगदान था और कैसे इस पत्रिका ने राहुल सांकृत्यायन को प्रभावित किया यह वह इस निबंध में बताते हैं। आप भी पढ़िए:

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कहानी: कलकत्ते में एक रात - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: कलकत्ते में एक रात – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

गाँव में रहने वाला कथावाचक जब पहली बार कलकत्ते में पहुँचता है तो उसके साथ क्या होता है ये आचार्य चतुरसेन ने अपनी कहानी ‘कलकत्ते में एक रात’ में बताया है। शहर में नये नये आये लोगों को कैसे ठग अपना शिकार बना देते हैं यह इसमें दर्शाया है। आप भी पढ़ें:

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हिंदी कहानी: जंजाल -प्रेमचंद

कहानी: जंजाल – प्रेमचंद

पार्वती को लगता था कि स्त्री की इज़्ज़त गहनों से ही होती है। इसीलिए जब उसके पति सुरेंद्र ने उसे नये गहने लाकर दिये तो वह बहुत खुश हुई। उसे लगा था कि अब उसके मायके में उसकी पूछ होगी। पर क्या असल में ऐसा हुआ? क्या उसकी सोच सही थी? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘जंजाल’:

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साहित्य अकादेमी द्वारा चंद्रपाल सिंह यादव ‘मयंक’ जन्मशती परिसंवाद का आयोजन

साहित्य अकादमी द्वारा चंद्रपाल सिंह यादव ‘मयंक’ जन्मशती परिसंवाद का आयोजन

साहित्य अकादमी द्वारा आज चंद्रपाल सिंह यादव ‘मयंक’ जन्मशती परिसंवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आरम्भ में सभी का स्वागत करते हुए साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने कहा कि मयंक जी सच्चे बाल साहित्यकार थे और उन्होंने बच्चों के लिए कुछ अनमोल गीत दिए हैं।

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कहानी: सौत - प्रेमचंद

कहानी: सौत – प्रेमचंद

रज़िया के पति रामू ने रज़िया की उम्र होने पर एक नयी पत्नी लाने का फैसला किया और आखिर उसकी सौत ले ही आया। वह घर जो रज़िया ने अपनी मेहनत से बनाया था अब उसका नहीं रहा था। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘सौत’:

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कहानी: हीरे का हार - चंद्रधर शर्मा गुलेरी

कहानी: हीरे का हार – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

‘हीरे का हार’ लेखक चंद्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा लिखी गयी कहानी है। इस कहानी को उन्होंने लिखना तो शुरु किया था लेकिन पूरा नहीं कर पाये थे। फिर इस कहानी को सुशील कुमार फुल्ल द्वारा पूरा किया गया था। आप भी पढ़ें:

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कहानी: अमिट छाप - जयशंकर प्रसाद

कहानी: अमिट छाप – जयशंकर प्रसाद

होली का त्यौहार आ चुका था और गोपाल होली मनाने के लिए उत्कंठित था। उसने मनोहरदास जी को सितार बजाने का अनुरोध किया तो उन्होंने बताया कि होली के दो दिनों में वो न सितार बजाते थे और न होली ही खेलते थे। वह ऐसा क्यों करते थे? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह कहानी ‘अमिट छाप’।

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बेआवाज़ लोगों की आवाज़ हैं अब्दुल बिस्मिल्लाह की रचनाएँ

‘उपलक्ष्य 75’ के अवसर पर हुआ अब्दुल बिस्मिल्लाह की संस्मरणों की किताब ‘स्मृतियों की बस्ती’ का लोकार्पण

हिन्दी कथा-संसार में हाशिए की ज़िंदगियों को आवाज़ देने वाले कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह अपने जीवन के 75 वर्ष पूरे कर चुके हैं। उनकी रचनाएँ गाँव-समाज, बोली-बानी और साधारण मनुष्य के संघर्षों का जीवंत दस्तावेज़ रही हैं। इसी रचनात्मक धरोहर का उत्सव मनाने के लिए 19 अगस्त की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (एनेक्स) में राजकमल प्रकाशन ने विशेष कार्यक्रम ‘उपलक्ष्य 75’ का आयोजन किया।

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