कहानीकला - प्रेमचंद

कहानी कला – प्रेमचंद

कहानी कैसी होनी चाहिए? कहानी लिखते समय कौन सी बातें ध्यान में रखनी चाहिए? यही लेखक प्रेमचंद द्वारा अपने इस लेख में बताया गया है। आप भी पढ़ें:

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उपन्यास रहस्य - महावीर प्रसाद द्विवेदी

उपन्यास रहस्य – महावीर प्रसाद द्विवेदी

उपन्यास किस तरह का होना चाहिए। उसकी रचना करते हुए किन किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। इन सब बातों पर महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा यह लेख लिखा गया था। लेख काफी हद तक आज भी प्रासंगिक है। आप भी पढ़ें:

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निबंध: उपन्यास रचना - प्रेमचंद

निबंध: उपन्यास रचना – प्रेमचंद

उपन्यास लेखन करते समय किन बातों का खयाल रखना चाहिए? उपन्यास कितने तरह के होते हैं और क्या चीज इन्हें एक दूसरे से अलग बनाती है। उपन्यास में प्लॉट का क्या महत्व है? यह ऐसे प्रश्न हैं जिनसे हर लेखक कभी न कभी जूझता है। कथासम्राट प्रेमचंद द्वारा इस विषय पर लिखा यह निबंध ‘उपन्यास रचना’ इन सभी प्रश्नों के उत्तर देता है। आशा है यह पाठकों और लेखकों के काम आएगा। आप भी इसे पढ़ें:

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कहानी: एक्सीडेंट - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: एक्सीडेंट – सुभद्रा कुमारी चौहान

कुसम की गाड़ी उस दिन प्राणनाथ की गाड़ी से टकरायी तो ऐसे उनकी जान-पहचान हुई। प्राणनाथ अपने दुश्चरित्र के कारण पूरे शहर में बदनाम था लेकिन कुसम को लगा कि वो उतना बुरा नहीं है जितना बनने की कोशिश करता है। क्या ये सच बात थी? आखिर प्राणनाथ ऐसा क्यों करता था। जानने के लिए पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘एक्सीडेंट’।

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कहानी: मुंडमाल - शिवपूजन सहाय

कहानी: मुंडमाल – शिवपूजन सहाय

महाराणा राजसिंह के सरदार चूड़ावतजी औरंगज़ेब से युद्ध करने जा रहे थे। पर उनका मन रह रह कर उनकी पत्नी पर जा रहा है जिनसे कुछ दिन पहले ही उनका विवाह हुआ है। वह आखिरी बार अपनी पत्नी से मिलने जाते हैं और उनसे अपने दिल का हाल कहते हैं। आगे क्या हुआ ये जानने के लिए पढ़ें लेखक शिवपूजन सहाय की यह कहानी ‘मुंडमाल’।

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कहानी: प्रवासी - रांगेय राघव

कहानी: प्रवासी – रांगेय राघव

गोपालन मंदिर का पुजारी था। उसने कोमल को देखा तो वह उसके मन में बस गयी लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। और फिर ऐसा कुछ हुआ कि गोपालन को घर छोड़कर प्रवासी बनना पड़ा। आखिर उसे ऐसा क्यों करना पड़ा? जानने के लिए पढ़ें रांगेय राघव की लिखी यह लम्बी कहानी ‘प्रवासी’।

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साहित्य और भाषा - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

साहित्य और भाषा – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

साहित्य की भाषा कैसी होनी चाहिए? सरल या क्लिष्ट। यह एक ऐसा विषय है जिस पर बहस निरंतर चलती रहती है। इस विषय पर सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा भी लिखा गया था। आप भी पढ़ें:

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सुकुल की बीबी - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

कहानी: सुकुल की बीबी – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

सुकुल कथावाचक का बहुत पुराना दोस्त था। आज काफी समय बाद उससे मिलने आया था। और साथ में उसकी बीबी। सुकुल की बीबी ने कथावाचक के सामने ऐसा प्रस्ताव रखा कि उसकी हैरत का ठिकाना न रहा। आखिर ऐसा कहा था सुकुल की बीबी ने? सुकुल और उसकी बीबी कथावाचक के पास क्यों आये थे? पढ़ें सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कहानी ‘सुकुल की बीबी’।

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कहानी: तीन देवता - महवीर प्रसाद द्विवेदी

कहानी: तीन देवता – महावीर प्रसाद द्विवेदी

वररुचि एक ब्राह्मण था जिसकी पत्नी उपकोशा अद्वितीय सुंदरी थी। जब वररुचि को तप के लिए हिमालय पर जाना पड़ा तो उसके वहाँ न होने पर उपकोशा के साथ जो घटना घटी वही वह यहाँ पाठकों को सुना रहा है। पढ़ें महावीर प्रसाद द्विवेदी की यह कहानी ‘तीन देवता’।

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लेखक विनोद कुमार शुक्ल की नवीन पुस्तक हुई रिलीज

लेखक विनोद कुमार शुक्ल की नयी किताब हुई रिलीज

लेखक विनोद कुमार शुक्ल की नवीन पुस्तक हिंद युग्म प्रकाशन द्वारा प्रकाशित होकर आ गयी है।। पुस्तक का लोकार्पण हालिया समाप्त हुए हिंद युग्म उत्सव में हुआ था। पढे विस्तृत खबर:

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कहानी: कम्युनिस्ट सभा - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: कम्युनिस्ट सभा – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

‘कम्युनिस्ट सभा’ विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की लिखी कहानी है। यह कहानी उनके कहानी संग्रह ‘रक्षा बंधन तथा अन्य कहानियाँ’ में संकलित हुई थी। इस कहानी में उन्होंने मुख्यतः कम्युनिस्टों को अपने व्यंग्यबाण के निशाने में लिया है। आप भी पढ़ें:

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कहानी: डॉक्टर साहब की घड़ी - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: डॉक्टर साहब की घड़ी – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

डॉक्टर वेदी रियायत के जाने माने डॉक्टर थे। जितना रियासत में उनका नाम था उतना ही उनकी घड़ी का भी नाम था। आखिर कैसी घड़ी थी ये और उसका इतना नाम क्यों था? पढ़ें आचार्य चतुरसेन की कहानी ‘डॉक्टर साहब की घड़ी’:

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