पुस्तक टिप्पणी: विधवा का पति – वेद प्रकाश शर्मा
लघु-कथा: हाथी के दाँत – विकास नैनवाल ‘अंजान’
पुस्तक टिप्पणी: जादुई अँगूठी – डॉ. मंजरी शुक्ला | फ्लाईड्रीम्स प्रकाशन
अच्छा भूत बनने का प्रशिक्षण भी देती है ‘भूतिया मास्साब’; ‘भूतिया मास्साब’ के लेखक प्रांजल सक्सेना से बातचीत
हिंदी आलोचना की जीवंत बहसों के केंद्र थे रामविलास शर्मा
सामाजिक विभाजन के दौर में ‘संगम-संस्कृति के साधक’ की याद
ड्रैकुला रेवेलेशन्स – सुदीप मेनन | बुल्सआय प्रेस
गोल्डन हत्यारा | तरुण कुमार वाही | राज कॉमिक्स बाय मनोज गुप्ता
सुपरबॉय | तरुण कुमार वाही | राज कॉमिक्स बाय मनोज गुप्ता