पीढ़ी-दर-पीढ़ी विचारों एवं मूल्यों को आगे बढ़ाती हैं कहानियाँ: गौरव कुमार निगम

Gaurav Kumar Nigam spoke on topic ek kahani kai nazariye in ayodhya faizabad book fair

अयोध्या, 24 अक्टूबर 2026: अयोध्या-फैजाबाद पुस्तक मेले में लखनऊ से आये लेखक और ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट गौरव कुमार निगम ने ‘एक कहानी, कई नज़रिये’ विषय पर विशेष आमंत्रित वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कहानियाँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सोच, निर्णयों, सामाजिक व्यवहार और उपभोक्ताओं की पसंद को भी प्रभावित करती हैं।

नारायण दास खत्री मेमोरियल ट्रस्ट, अयोध्या द्वारा आयोजित पुस्तक मेले में निगम ने पुस्तकों और ऐसे साहित्यिक आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कल्पना और रचनात्मकता को मनुष्य की विशिष्ट क्षमताएँ बताते हुए कहा कि कहानियाँ वास्तविकता और कल्पना के बीच एक ऐसा पुल हैं, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने अनुभवों को अर्थ देता है, दूसरों के अनुभवों को समझता है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी विचारों एवं मूल्यों को आगे बढ़ाता है।

कहानी की बुनियादी संरचना पर चर्चा करते हुए उन्होंने कथावस्तु, पात्र, संवाद, देशकाल एवं वातावरण, भाषाशैली और उद्देश्य अथवा भाव जैसे प्रमुख तत्वों को रेखांकित किया।

प्रस्तुति का एक प्रमुख हिस्सा महाभारत के शकुनि के चरित्र पर केंद्रित रहा। निगम ने शकुनि की पृष्ठभूमि से जुड़ी एक प्रचलित कथा के माध्यम से श्रोताओं को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि किसी पात्र को केवल उसके दिखाई देने वाले कर्मों के आधार पर परखना पर्याप्त है या उसके पीछे की परिस्थितियों और अनुभवों को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शकुनि को केवल खलनायक के रूप में देखा जाना चाहिए या उसकी कथा के दूसरे पक्ष को भी समझने का प्रयास करना चाहिए।

कहानियों के सामाजिक और व्यावसायिक प्रभाव पर बात करते हुए निगम ने त्योहारों, उपहार देने की बदलती परम्पराओं और विज्ञापन-जगत के उदाहरणों का उल्लेख किया। गूगल के पुनर्मिलन पर आधारित विज्ञापन, सर्फ इक्सेल के ‘दाग अच्छे हैं’ अभियान और फेविकोल के विज्ञापनों का संदर्भ देते हुए उन्होंने समझाया कि प्रभावी कहानी किसी उत्पाद की विशेषताएँ बताने से आगे बढ़कर दर्शकों के मन में भावनात्मक जुड़ाव और एक यादगार पहचान बना सकती है।

इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “कहानीकार होने के लिए यह ज़रूरी नहीं कि आप कुछ असाधारण लिखें। ज़रूरी यह है कि किसी साधारण घटना को असाधारण दृष्टि से देखें।”

सत्र के अंतिम हिस्से में उन्होंने कहानी कहने और लिखने की कला विकसित करने के लिए अवलोकन, संवेदनशीलता एवं सहानुभूति, जिज्ञासा एवं कल्पनाशीलता, पढ़ने और सीखने की आदत, धैर्यपूर्वक सुनने तथा अपनी रचना में संशोधन करने के साहस को महत्त्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अच्छी कहानियाँ अक्सर जीवन की सामान्य घटनाओं, छोटी-छोटी बारीकियों और मानवीय अनुभवों को ध्यान से देखने से जन्म लेती हैं।

गौरव कुमार निगम हिंदी क्राइम-थ्रिलर स्कैंडल इन लखनऊ के लेखक हैं। उनकी रुचि अपराध-कथा, मानवीय व्यवहार और ब्रांड रणनीति जैसे विषयों में है। लेखक के रूप में वे कहानी की शक्ति और उसके सामाजिक प्रभाव को समझने के साथ-साथ ब्रांड संचार में उसकी भूमिका पर भी काम करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में अयोध्या-फ़ैज़ाबाद पुस्तक मेले की आयोजन समिति और नारायण दास खत्री मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से गौरव कुमार निगम को स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया तथा सत्र के लिए आभार व्यक्त किया गया।


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