पुस्तक टिप्पणी:रेलगाड़ी का भूत – वेद प्रकाश काम्बोज
‘रेलगाड़ी का भूत’ लेखक वेद प्रकाश काम्बोज की लिखी रहस्यकथा है। उपन्यास शिलालेख प्रकाशन द्वारा 2018 में प्रथम बार प्रकाशित किया गया था।
पुस्तक टिप्पणी:रेलगाड़ी का भूत – वेद प्रकाश काम्बोज Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
‘रेलगाड़ी का भूत’ लेखक वेद प्रकाश काम्बोज की लिखी रहस्यकथा है। उपन्यास शिलालेख प्रकाशन द्वारा 2018 में प्रथम बार प्रकाशित किया गया था।
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संस्करण विवरण: फॉर्मैट: पैपरबैक | पृष्ठ संख्या: 148 | प्रकाशन: नीलम जासूस कार्यालय पुस्तक लिंक: अमेज़न कहानी राजनगर के होटल डी गारिका में दीपक मेहरा का कत्ल कर दिया गया था। …
खोये शहर की खोज – वेद प्रकाश कांबोज | नीलम जासूस कार्यालय Read More
संस्करण विवरण: फॉर्मैट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 122 | प्रकाशक: जीपीएच बुक्स | शृंखला: विजय पुस्तक लिंक: अमेज़न कहानी हुचांग को चीनी जासूसी संस्था के चीफ ने विजय के कब्जे से वह जरूरी कागजात लेने की जिम्मेदारी दी थी …
पासे पलट गए – वेद प्रकाश कांबोज | जी पी एच बुक्स Read More
संस्करण विवरण: फॉर्मैट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 95 | प्रकाशक: जीपीएच बुक्स | शृंखला: विजय पुस्तक लिंक: अमेज़न कहानी चीनियों के अनुसार भारत और रूस के बीच एक वार्ता हुई …
दाँव-खेल – वेद प्रकाश कांबोज | गुल्लीबाबा – जीपीएच बुक्स Read More
राम पुजारी द्वारा लिखी गई कांबोजनामा वेद प्रकाश कांबोज की जीवनी नहीं है बल्कि वह उनके लेखकीय जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाती हुई किताब है। पुस्तक नीलम जासूस कार्यालय द्वारा प्रकाशित की गयी है। पढ़ें पुस्तक पर लिखी यह टिप्पणी:
पुस्तक टिप्पणी: काम्बोजनामा: किस्सा किस्सागो का | राम ‘पुजारी’ | नीलम जासूस कार्यालय Read More
संस्करण विवरण: फॉर्मैट: पैपरबैक | पृष्ठ संख्या: 128 | प्रकाशन: नीलम जासूस कार्यालय | शृंखला: विजय पुस्तक लिंक: अमेज़न कहानी कोटाम्बू नामक शहर बदमाशों की बस्ती नाम से जाना जाता था। …
बदमाशों की बस्ती – वेद प्रकाश काम्बोज Read More
‘तबाही का देवता’ नीलम जासूस कार्यालय से प्रकाशित हुआ लेखक वेद प्रकाश काम्बोज का विजय शृंखला का उपन्यास है। पढ़ें उपन्यास पर लिखी यह टिप्पणी:
गुप्तचरी के साथ फंतासी का तड़का लिए हुए है ‘तबाही का देवता’ | वेद प्रकाश काम्बोज Read More
पहला वाक्य: ‘हरीओम!’ जेलर के कमरे से बहर निकलकर दोनों ने एक-दूसरे की ओर मुस्कराकर देखते हुए नारा सा लगाया और फिर जेल से बाहर निकलने के लिए लोहे के …
खतरे की खोपड़ी – वेद प्रकाश काम्बोज Read More