न बैरी न कोई बेगाना: कुछ आपबीती, कुछ जगबीती

सुरेन्द्र मोहन पाठक आज हिन्दी अपराध साहित्य के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले लेखक हैं। सन 2018 में जब उनकी आत्मकथा का पहला भाग न बैरी न कोई बैगाना प्रकाशित हुआ था तो मित्र राशीद शेख ने पुस्तक पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखी थी। उस वक्त यह लेख एक हिन्दी अखबार में भी प्रकाशित हुआ था। राशीद शेख का लिखा यह लेख बहुत ही खूबसूरत तरीके से किताब के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है। आप भी पढ़िए।

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जीवन का रंगमंच – अमरीश पुरी

रेटिंग : 4.5/5 किताब जनवरी 4 2017 से फरवरी 27 ,2017  के बीच पढ़ी गयी संस्करण विवरण : फॉर्मेट : पपेरबैक पृष्ठ संख्या : प्रकाशक : वाणी प्रकाशन अनुवादिका : नीरू सहलेखिका …

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