कहानी: टू फैट लेडीज़ - अनुपमा नौडियाल

कहानी: टू फैट लेडीज़ – अनुपमा नौडियाल

क्लब कल्चर आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवारों के जीवन एक हिस्सा रहा है। यहाँ वह मिलने जुलने और समय बिताने जाते हैं। अपनी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’ के माध्यम से लेखिका अनुपमा नौडियाल ने ऐसे ही एक वुमन्स क्लब की मीटिंग को दर्शाया है। यहाँ जो कुछ होता है उसके माध्यम से लेखिका ने इस क्लब संस्कृति और वहाँ मौजूद लोगों के बनावटीपन और दिखावेबज़ी पर कटाक्ष किया है। आप भी पढ़ें उनकी लिखी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’:

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लेखक अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का हुआ लोकार्पण

लेखक अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का हुआ लोकार्पण

लेखक-इतिहासकार अशोक कुमार पांडेय की नई किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का लोकार्पण 20 दिसम्बर की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में हुआ। राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस किताब के लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता सुपरिचित इतिहासकार प्रोफ़ेसर एस. इरफ़ान हबीब ने की।

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कहानी: पत्रकार - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: पत्रकार – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

मि. सिन्हा ‘लाउड स्पीकर’ नामक समाचार पत्र में एक पत्रकार थे। उनके सम्पादक ने उन्हें एक काम सौंपा था। क्या था ये काम? क्या वो ये कार्य कर पाए?
पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की कहानी ‘पत्रकार’:

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हिंदी कहानी: भेड़िये - भुवनेश्वर

कहानी: भेड़िये – भुवनेश्वर

‘भेड़िये’ भुवनेश्वर की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। यह कहानी 1938 में हंस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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कहानी: धर्म संकट - रांगेय राघव

कहानी: धर्म संकट – रांगेय राघव

हरदेव और उसके बेटे भगवानदास के बीच झगड़ा बढ़ता जा रहा था। इन दोनों के झगड़े के बीच हरदेव की पत्नी और भगवानदास की माँ पिसती रहती। वह किसका साथ दे यही उसका धर्मसंकट था। आगे क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें रांगेय राघव की कहानी ‘धर्म संकट’:

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कहानी: दुराचारी - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: दुराचारी – सुभद्रा कुमारी चौहान

पंडित जी पड़ोस में रहने वाले दयाशंकर से परेशान थे। वह उन्हें दुराचारी लगता था। वक्त बेवक्त वह गाने बजाता रहते और नाचने गाने वालियों को भी अपने घर बुलाकर ये काम करवाता था। अपने पड़ोसियों से वह उसकी शिकायत करते रहते थे। आगे क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कहानी ‘दुराचारी’:

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कहानी: घिसटता कम्बल - रांगेय राघव

कहानी: घिसटता कम्बल – रांगेय राघव

रागनी और विनय के माध्यम से रंगेय राघव ने शहरों में रहने वाले ऐसे नवयुगलों के जीवन को दर्शा रहे हैं जो कम आय में गुजर बसर करने को मजबूर हैं। विवाह को उन्होंने एक ऐसा कम्बल बताया है जो यात्री के कंधे पर पड़ा रहता है और जैसे जैसे यात्री चलता जाता है वह घिसटते हुए मेला होता जाता है। कहानी पढ़ें:

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एक टोकरी भर मिट्टी - माधवराव सप्रे

कहानी: एक टोकरी भर मिट्टी – माधवराव सप्रे

ज़मींदार साहब की इच्छा थी कि उनके महल के पास मौजूद झोपड़ी तक अपने महल को बढ़ा लें। उन्होंने अपनी इच्छा भी पूरी कर ली। आगे क्या हुआ? पढ़ें माधवराव सप्रे की कहानी ‘एक टोकरी भर मिट्टी’:

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गुरुकुल में तीन दिन - प्रेमचंद

गुरुकुल में तीन दिन – प्रेमचंद

1927 के आषाढ़ में प्रेमचंद गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय गये थे। वह तीन दिनों तक उधर रुके रहे। वहाँ उनके जो अनुभव थे उसे उन्होंने इस वृत्तांत में लिखा है। यह वृत्तांत माधुरी पत्रिका के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:

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कहानी: हेर-फेर - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: हेर-फेर – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

बसंतलाल और हेमलता एक दूसरे को प्रेम करते थे लेकिन फिर उनकी शादी न हो सकी। अब बारह साल बाद वह दोबारा मिल रहे थे। इस मुलाकात का क्या परिणाम निकला। पढ़ें आचार्य चतुरसेन शास्त्री की कहानी ‘हेर-फेर’:

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कहानी: सुखमय जीवन - चंद्रधर शर्मा गुलेरी

कहानी: सुखमय जीवन – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

कहानी का कथावाचक एल एल बी की परीक्षा के परिणाम के देर से आने से परेशान था। अपने को तरो ताज़ा करने के लिए उसने अपनी साइकल से बाहर का चक्कर लगाने की ठानी। आगे क्या हुआ, ये जानने के लिए पढ़ें चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी ‘सुखमय जीवन’।

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दक्षिण भारत में हमारी हिंदी प्रचार यात्रा - प्रेमचंद

दक्षिण भारत में हमारी हिंदी प्रचार यात्रा – प्रेमचंद

सन् 1934 में हिंदी प्रचार सभा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रेमचंद मद्रास गये थे। मद्रास से वह मैसूर गये और वहाँ से बेंगलुरू गये। अपनी यात्रा के दौरान उनके जो अनुभव थे उन्होंने इस लेख में उन अनुभवों के विषय में लिखा है। आप भी पढ़ें:

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