लघु-कथा: चाँद गवाही देगा – गजानन रैना
गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। खास अंदाज में लिखी अपनी साहित्यिक टिप्पणी के लिए वह जाने जाते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़ें उनकी लिखी लघु-कथा ‘चाँद गवाही देगा’।
लघु-कथा: चाँद गवाही देगा – गजानन रैना Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। खास अंदाज में लिखी अपनी साहित्यिक टिप्पणी के लिए वह जाने जाते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़ें उनकी लिखी लघु-कथा ‘चाँद गवाही देगा’।
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‘गालियाँ’ लेखक चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लिखी लघु-कथा है। लेखक इस लघु-कथा के माध्यम से समाज में फैल रहे व्यभिचार के ऊपर टिप्पणी करते हैं। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: गालियाँ – चंद्रधर शर्मा गुलेरी Read More
कथावाचक को जब पता लगा कि उसका दोस्त उसे साँप का मणि दिलवा सकता है तो उसका हैरान होना लाज़मी था। आखिर क्या था ये मणि? क्या असल में ये साँप का मणि था? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की यह लघु-कथा ‘साँप का मणि’।
लघु-कथा: साँप का मणि – प्रेमचंद Read More
‘लड़ाई’ भुवनेश्वर की लिखी लघु-कथा है। यह रचना हंस पत्रिका के वर्ष 1939 के सितम्बर में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: लड़ाई – भुवनेश्वर Read More
‘दरिंदे’ लेखक योगेश मित्तल की लिखी लघु-कथा है। यह रचना ‘अपराध कथाएँ’ नामक पत्रिका के विशेषांक में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें।
लघु-कथा: दरिंदे – योगेश मित्तल Read More
आज की दुनिया एआईमय हो चुकी है। एक दौड़ सी लगी है जिसमें मनुष्य ए आई के साथ साथ दौड़ रहा है। इस दौड़ का क्या नतीजा निकलेगा ये तो भविष्य ही तय करेगा। लेकिन ये बात भी सच है कि तकनीक कोई बुरी नहीं होती लेकिन उसका प्रयोग किस तरह किया जा रहा है वह उसे बुरा या अच्छा बनाता है। इसी प्रसांगिक विषय को शोभित गुप्ता ने अपनी इस लघु-कथा में बुना है। आशा है ये लघु-कथा आपको पसंद आएगी।
लघुकथा: जीपीटी – शोभित गुप्ता Read More
‘भूगोल’ लेखक चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लिखी लघु-कथा है। इस लघु-कथा के माध्यम से वह शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हैं। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: भूगोल – चंद्रधर शर्मा गुलेरी Read More
‘बाबा जी का भोग’ प्रेमचंद की लिखी लघुकथा है। मेहनतकश छोटे किसानों की हालत यह लघु-कथा ब्यान करती है और सोचने को काफी कुछ दे जाती है। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: बाबा जी का भोग – प्रेमचंद Read More
कमल का सब कुछ लुट चुका था। अब उसके पास बचा था तो केवल एक रुपया। उसने इस एक रुपये का क्या किया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लिखी यह लघु-कथा ‘विजया’।
लघु-कथा: विजया – जयशंकर प्रसाद Read More
‘हाथी के दाँत’ विकास नैनवाल ‘अंजान’ की लिखी लघु-कथा है। अक्सर हमारी कथनी और करनी में फर्क होता है। कहानी इसी बात को रेखांकित करती है। यह प्रथम बार उत्तरांचल पत्रिका के अगस्त 2019 अंक में प्रकाशित हुई थी।
लघु-कथा: हाथी के दाँत – विकास नैनवाल ‘अंजान’ Read More
‘मगर का शिकार’ प्रेमचंद की लिखी एक रचना है। कथावाचक को जब कुछ मछुआरे एक बकरी के बच्चे को नदी के पास लेकर आते मिले तो उनके मन में कोतूहल जागा। आखिर वो बकरी के बच्चे का क्या करना चाहते थे? जानने के लिए पढ़ें ये रचना:
लघु-कथा: मगर का शिकार – प्रेमचंद Read More
जग्गैया और कामैया एक साथ खेला करते थे। उनके बीच चुहलबाज़ी चलती रहती थी। फिर उनके बीच अनबोला हो गया। ये अनबोला क्यों हुआ? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा ‘अनबोला’:
लघु-कथा: अनबोला – जयशंकर प्रसाद Read More