फिल्म और साहित्य - प्रेमचंद

फिल्म और साहित्य – प्रेमचंद

मई 1935 में प्रेमचंद का लिखा एक लेख ‘सिनेमा और साहित्य’ ‘लेखक’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस लेख को पढ़ने के बाद नरोत्तमप्रसाद नागर ने उस लेख का प्रतिवाद लिखा था। प्रेमचंद का वो लेख, नरोत्तमप्रसाद का प्रतिवाद और उनके प्रतिवाद का दिया गया प्रेमचंद का जवाब यहाँ पर दिया जा रह है। यह पूरा लेख हंस पत्रिका में जून 1935 में प्रकाशित हुआ था। आज भी सिनेमा और साहित्य के बीच की यह बहस प्रासंगिक है। आप भी इसे पढ़ें:

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कहानी कला - शिवपूजन सहाय

कहानी कला – शिवपूजन सहाय

कहानी क्या होती है? उसकी क्या विशेषताएँ हैं? कहानी और उपन्यास में क्या फर्क है? इन प्रश्नों का उत्तर तो शिवपूजन सहाय अपने इस लेख में देते ही हैं साथ ही अपने समय के कुछ चुनिंदा कहानिकारों और चुनिंदा कहानियों से पाठकों का परिचय करवाते हैं। आप भी पढ़ें:

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दो लेखकों द्वारा मिल कर लिखी जाने वाली प्रथम शृंखला

दो लेखकों द्वारा मिल कर लिखी जाने वाली प्रथम शृंखला

योगेश मित्तल को लेखन के क्षेत्र में आने का मौका कैसे मिला और किस तरह उन्होंने अपने साथी लेखक बिमल चटर्जी के साथ मिलकर एक शृंखलाबद्ध उपन्यास लिखना शुरु किया? यह वह इस संस्मरण में साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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कहाँ-कहाँ न गये घना’दा - जयदीप शेखर

कहाँ-कहाँ न गये घना’दा – जयदीप शेखर

जयदीप शेखर लेखक और अनुवादक हैं। बांग्ला साहित्य में रुचि रखते हैं। बांग्ला से हिंदी में उन्होंने कई पुस्तकों का अनुवाद किया है। बांग्ला लेखक प्रेमेंद्र मित्र के किरदार घनादा और उसको लेकर लिखी गयी कहानियों का वह इस लेख में पाठक से परिचय करवा रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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ये हैं हिंदी में वर्ष 2025 में प्रकाशित हॉरर विधा की कुछ पुस्तकें

वर्ष 2025 में पाठकों को खौफ के नये सफर पर ले जाने आयी हिंदी की ये पुस्तकें; आपने कितनी पढ़ी हैं?

हॉरर कथाएँ मनुष्य को हमेशा से ही आकर्षित करती रही हैं। यह सिहरन पैदा करने वाले किस्से एक तरह का रोमांच पैदा करते हैं और व्यक्ति इसी रोमांच की तलाश में हॉरर विधा की पुस्तकों तक भी जाता है। वर्ष 2025 में हिंदी में भी काफी रचनाएँ हॉरर विधा में प्रकाशित हुई हैं। उनमें से कुछ रचनाओं की सूची हम आपके समक्ष यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं।

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लेख: ज़ारी रहेगा लोकप्रिय लेखन लेकिन... - पराग डिमरी

लेख: ज़ारी रहेगा लोकप्रिय लेखन लेकिन… – पराग डिमरी

लेखक पराग डिमरी उस पीढ़ी के हैं जिन्होंने हिंदी लोकप्रिय साहित्य का स्वर्णिम काल देखा है। अपने इस लेख में वह न केवल उस स्वर्णिम काल का वर्णन कर रहें हैं बल्कि इस विधा के धीरे धीरे कम होने के कारणों पर रोशनी डालते हुए और मौजूदा स्थिति से भी पाठक को अवगत करा रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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साहित्य का आधार - प्रेमचंद

साहित्य का आधार – प्रेमचंद

साहित्य क्या है? साहित्य और प्रोपागैंडा में क्या फर्क है? वह क्या है जो साहित्य से प्रोपोगैंडा को जुदा करता है? इन्हीं सब बातों को साफ करते हुए प्रेमचंद ने 1932 में ये लेख लिखा था। आप भी पढ़ें:

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बातचीत करने की कला - प्रेमचंद

बातचीत करने की कला – प्रेमचंद

बातचीत करना भी एक कला है। हर कोई सुरुचिपूर्ण बातें न कर पाता है और न बातों से श्रोताओं को बाँध ही पाता है। कैसे इस कला का धीरे-धीरे लोप हो रहा है और इसके क्या नुकसान होते हैं। किस तरह इस कला में प्रवीण बना जा सकता है और इसके क्या फायदे हो सकते हैं ये दर्शाते हुए प्रेमचंद ने यह लेख लिखा था। आप भी पढ़ें:

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कहानीकला - प्रेमचंद

कहानी कला – प्रेमचंद

कहानी कैसी होनी चाहिए? कहानी लिखते समय कौन सी बातें ध्यान में रखनी चाहिए? यही लेखक प्रेमचंद द्वारा अपने इस लेख में बताया गया है। आप भी पढ़ें:

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पॉकेट बुक्स में ट्रेडमार्क लेखकों की शुरुआत - योगेश मित्तल

पॉकेट बुक्स में ट्रेडमार्क लेखकों की शुरुआत – योगेश मित्तल

पॉकेट बुक्स में जितने लेखकों ने अपने नाम से लिखा है उससे अधिक लेखकों ने प्रकाशकों के लिए भूत नाम या ट्रेडनाम से लिखा है। आखिर ये चलन कब शुरु हुआ? इसी पर रोशनी डाल रहे हैं श्री योगेश मित्तल जिन्होंने कई प्रकाशकों के लिए ट्रेड नाम से सेकड़ों उपन्यास लिखे हैं। आप भी पढ़ें:

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मेरी पहली रचना - प्रेमचंद

मेरी पहली रचना – प्रेमचंद

कथासम्राट प्रेमचंद की पहली रचना कौन सी थी? अपने बचपन में उन्होंने क्या क्या पढ़ा था? यह सब वह इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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असली केशव पंडित और उसका बेटा - योगेश मित्तल

असली केशव पंडित और उसका बेटा – योगेश मित्तल

केशव पंडित लेखक वेद प्रकाश शर्मा के सबसे मकबूल किरदारों में से एक था। इसकी प्रसिद्धि का अंदाजा ही इस बात से लगाया जा सकता है कि आगे जाकर केशव पंडित की प्रसिद्ध को भुनाने के लिए प्रकाशकों ने इसका ट्रेडनाम के तरह प्रयोग तो किया ही साथ ही केशव पंडित के परिवार वालों के नाम पर भी उपन्यास प्रकाशित किए। पर असली केशव पंडित कौन था? इस पर लेखक योगेश मित्तल यह लेख प्रकाश डालता है। आप भी पढ़ें।

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