ममता कालिया ने हिन्दी कथा और संस्मरण लेखन को नई दृष्टि दी है

ममता कालिया ने हिन्दी कथा और संस्मरण लेखन को नई दृष्टि दी है

16 मार्च, 2026 (सोमवार); नई दिल्ली।
हिंदी की वरिष्ठ लेखक ममता कालिया को उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिए जाने की घोषणा पर राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।

जीते जी अलाहाबाद - ममता कालिया

अशोक महेश्वरी ने कहा कि ममता कालिया का लेखन जीवन के साधारण दिखने वाले प्रसंगों में छिपे गहरे अर्थों को सामने लाने की क्षमता रखता है। वे ऐसी लेखक हैं जिनकी रचनाएँ कई दशकों से पाठकों और साहित्यिक जगत को लगातार समृद्ध करती रही हैं। ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिया जाना उनके दीर्घ और महत्वपूर्ण साहित्यिक योगदान का स्वाभाविक स्वीकार है।

उन्होंने कहा कि प्रकाशक और लेखक की यात्रा हमेशा साझी होती है। ‘जीते जी इलाहाबाद’ सहित ममता कालिया की अनेक महत्वपूर्ण कृतियाँ राजकमल प्रकाशन समूह से प्रकाशित हुई हैं और उनके साथ यह साहित्यिक रिश्ता लंबे समय से बना हुआ है। हमें यह संतोष और खुशी है कि उनकी लेखन-यात्रा के कई महत्वपूर्ण पड़ावों में राजकमल प्रकाशन समूह भी सहभागी रहा है।

जीते जी इलाहाबाद’ में ममता कालिया ने अपने अनुभवों, स्मृतियों और समय को जिस आत्मीयता और संवेदनशीलता के साथ दर्ज किया है, वह पाठकों को एक साथ निजी और सामाजिक जीवन की कई परतों से रू-ब-रू कराता है। इस कृति के लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिया जाना प्रकाशक होने के नाते हमारे लिए भी अत्यन्त खुशी और गर्व का विषय है।

अशोक महेश्वरी ने कहा कि साहित्य अकादेमी द्वारा ममता कालिया को सम्मानित किया जाना हिन्दी साहित्य के लिए भी खुशी की बात है। इस निर्णय से साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित राजकमल के लेखकों की सूची में एक और महत्वपूर्ण नाम जुड़ा है और इसके लिए हम साहित्य अकादेमी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।


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