30 मार्च 2025, इंदौर: इंदौर में वामा साहित्य मंच के बैनर तले लेखिका डॉ. किसलय पंचोली के कथा संग्रह ‘गेट से बाहर फ्रायड’ का विमोचन सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल के सभागृह में हुआ। ‘गेट से बाहर फ्रायड’ में लेखिका की 14 कहानियों को संगृहीत किया गया है। पुस्तक का प्रकाशन साहित्य विमर्श प्रकाशन द्वारा किया गया है।
आयोजन के स्वागत उद्बोधन में अध्यक्ष ज्योति जैन ने वामा साहित्य मंच का संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने कहा कि सदस्याओं के मौलिक सृजन की गुणवत्ता नित नए आयाम छू रही है।
साहित्यकार मधु कांकरिया अपने वक्तव्य में कहा कि कहानीकार में विद्रोह का स्वर बदलाव लाता है। वह अपने सरोकारों और संवेदनाओं का विस्तार किए बिना ऊँचाई नहीं प्राप्त कर सकता। डॉ.किसलय की कहानियों में मध्यमवर्गीय दर्द, असुरक्षा, स्त्री विमर्श, जीवन की छोटी छोटी सच्चाइयाँ मौजूद हैं।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अनुराधा शंकर ने कहा कि डॉ. किसलय पंचोली ने बहुत ही अनछुए विषय अपनी कहानियों के लिए चुनें हैं, उन्होंने अपनी सूक्ष्मदर्शिता से शिल्प के बड़े विधान खड़े किए बिना भी लेखन को उत्त्कृष्टता प्रदान की है।
मनोवैज्ञानिक एवं लेखक डॉ. संदीप अत्रे ने कहा कि लेखिका में लेखन की बहुत सारी खूबियाँ मौजूद हैं। वे अपनी बात को बड़ी शालीनता से कहती भी हैं और छुपाती भी हैं। उनकी कहानियों में प्रकृति एक किरदार की तरह विद्यमान है। डॉक्टर अत्रे ने कहा कि किसी एक फिल्म के दृश्य में आप कई अलग अलग लोगों की मेहनत और विजन देखते हैं लेकिन कहानी में कहानीकार ही वह हर काम कर रहा होता है जो एक दृश्य रचने के लिए जरुरी हों।

अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए डॉ. किसलय पंचोली ने कहा कि कहानी वह टूल है जिससे मानसिकता परिष्कृत हो सकती है। मेरा मानना है कि वैयक्तिक स्वायत्तता के साथ परिवार, विकास के साथ पर्यावरण और धर्म के साथ मानवता को बचाए रखने के में कोई विधा बेहद सम्प्रेषणीय हो सकती है तो वह है कहानी लेखन। कहानी लिखना मुझे अच्छा लगता है जो मन के तनाव को भी कम करता है।
कार्यक्रम का संचालन स्मृति आदित्य ने किया। सत्यनारायण पंचोली, हरेराम वाजपेयी, प्रदीप नवीन सहित शहर की साहित्य संस्थाओं ने लेखिका का अभिनन्दन किया। अतिथियों का स्वागत व स्मृति चिन्ह प्रदान करने में डॉ. गरिमा दुबे, डॉ. अपूर्व पौराणिक, सात्विका, कविता अर्गल, गीता व्यास, कोमल रामचंदानी, निधि जैन, विभा व्यास, कुमार कक्काड़, डॉ नीरजा पौराणिक, जयंत पटवा, नारायणन कक्काड़, मंजू उपाध्याय, पुष्पा शर्मा, डॉ. ऋतु पौराणिक, मनोरमा ठाकरिया की भूमिका रही। श्रीमती त्रिवेणी पौराणिक ने बेटी किसलय को आशीर्वचन दिए। आभार किंजल्क पंचोली ने व्यक्त किया।
(वामा साहित्य मंच के फेसबुक पृष्ठ पर प्रकाशित डॉक्टर रागिनी सिंह की रिपोर्ट से साभार। )