3अप्रैल 2026, देहरादून: 2 अप्रैल 2026 को दून पुस्तकालय के सभागार में समय साक्ष्य द्वारा प्रकाशित कथा संग्रह ‘पनाळ‘ का लोकार्पण और उस पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। ‘पनाळ’ के माध्यम से पहली बार गढ़वाली में लिखी जा रही कहानियों का अनुवाद हिंदी के पाठकों के लिए समय साक्ष्य द्वारा लाया गया है। कहानियों का अनुवाद कांता घिल्डियाल द्वारा किया गया है।
पुस्तक लोकार्पण और परिचर्चा की अध्यक्षता कवि और लेखक राजेश सकलानी द्वारा की गई। कार्यक्रम में अनुवादक कांता घिल्डियाल और चर्चाकार के रूप में लेखक मदन मोहन डुकलाण, लेखक गणेश खुगशाल ‘गणी’ और कर्नल मदन मोहन कंडवाल मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन लेखिका बीना बेंजवाल द्वारा किया गया।

बताते चलें कथा संग्रह ‘पनाळ‘ में 22 कहानियाँ संकलित है। चर्चित अनुवादक कांता घिल्डियाल द्वारा अनुदित इस पुस्तक में सदानंद कुकरेती, विद्यावती डोभाल, रमा प्रसाद घिल्डियाल, डाॅ. महाबीर प्रसाद गैरोला, भगवती प्रसाद जोशी, कन्हैया लाल डंडरियाल, सर्वेश्वर दत्त कांडपाल, सुमित्रा जुगलान, प्रताप शिखर, सुरेन्द्र पाल, वीरेंद्र पंवार, निरंजन सुयाल, मदन मोहन डुकलाण, गजेंद्र नौटियाल, ओमप्रकाश सेमवाल, महेशानंद, कुसुम नौटियाल, बीना बेंजवाल, कमल रावत, बलवीर राणा और मंगला नंद जैसे नामचीन कथाकारों की कहानियाँ शामिल हैं। ऐसे में यह पुस्तक वृहद गढ़वाली साहित्य से हिंदी के पाठकों का परिचय करवाने का महत्वपूर्ण कार्य करती है।
(प्रकाशन के फेसबुक पेज से मिली जानकारी पर आधारित)
