लेखक अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का हुआ लोकार्पण

लेखक अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का हुआ लोकार्पण

लेखक-इतिहासकार अशोक कुमार पांडेय की नई किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का लोकार्पण 20 दिसम्बर की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में हुआ। राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस किताब के लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता सुपरिचित इतिहासकार प्रोफ़ेसर एस. इरफ़ान हबीब ने की।

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कहानी कला - शिवपूजन सहाय

कहानी कला – शिवपूजन सहाय

कहानी क्या होती है? उसकी क्या विशेषताएँ हैं? कहानी और उपन्यास में क्या फर्क है? इन प्रश्नों का उत्तर तो शिवपूजन सहाय अपने इस लेख में देते ही हैं साथ ही अपने समय के कुछ चुनिंदा कहानिकारों और चुनिंदा कहानियों से पाठकों का परिचय करवाते हैं। आप भी पढ़ें:

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दो लेखकों द्वारा मिल कर लिखी जाने वाली प्रथम शृंखला

दो लेखकों द्वारा मिल कर लिखी जाने वाली प्रथम शृंखला

योगेश मित्तल को लेखन के क्षेत्र में आने का मौका कैसे मिला और किस तरह उन्होंने अपने साथी लेखक बिमल चटर्जी के साथ मिलकर एक शृंखलाबद्ध उपन्यास लिखना शुरु किया? यह वह इस संस्मरण में साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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कहाँ-कहाँ न गये घना’दा - जयदीप शेखर

कहाँ-कहाँ न गये घना’दा – जयदीप शेखर

जयदीप शेखर लेखक और अनुवादक हैं। बांग्ला साहित्य में रुचि रखते हैं। बांग्ला से हिंदी में उन्होंने कई पुस्तकों का अनुवाद किया है। बांग्ला लेखक प्रेमेंद्र मित्र के किरदार घनादा और उसको लेकर लिखी गयी कहानियों का वह इस लेख में पाठक से परिचय करवा रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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मैं मशहूर क्यों नहीं हुआ - योगेश मित्तल

मैं मशहूर क्यों नहीं हुआ – योगेश मित्तल

योगेश मित्तल ने अपने लेखन करियर के अधिकतर वर्षों में ट्रेड नामों के लिए लेखन किया। इस कारण वह गुमनामी में रहे और उन्हें वह ख्याति न मिल सकी जो उन्हें तब मिलती जब वो अपने नाम से छपते। पर ऐसा नहीं था कि उन्हें मशहूर होने का मौके नहीं मिले थे लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि वह महशूर नहीं हो सके। लेखक योगेश मित्तल अपने शब्दों में यह बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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लंदननामा: आप भूत प्रेत पर यकीन करते हैं?

लंदननामा: आप भूत प्रेत पर यकीन करते हैं?

संदीप नैयर लंदन में रहते हैं। लंदनदनामा में वह लंदन के अपने अनुभवों को साझा करते हैं जिससे पाठक का परिचय लंदन के जीवन और वहाँ की संस्कृति से होता है। आप भी पढ़ें लंदननामा की यह किश्त:

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गुरुकुल में तीन दिन - प्रेमचंद

गुरुकुल में तीन दिन – प्रेमचंद

1927 के आषाढ़ में प्रेमचंद गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय गये थे। वह तीन दिनों तक उधर रुके रहे। वहाँ उनके जो अनुभव थे उसे उन्होंने इस वृत्तांत में लिखा है। यह वृत्तांत माधुरी पत्रिका के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:

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सरयूपार की यात्रा - भारतेंदु हरिश्चंद्र

सरयूपार की यात्रा – भारतेंदु हरिश्चंद्र

भारतेंदु हरीश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का पिता माना जाता है। उनके लिखे नाटक प्रसिद्ध हैं। ‘सरयूपार की यात्रा’ में भारतेंदु हरीश्चंद्र ने अयोध्या की यात्रा के दौरान हूए अनुभव का वर्णन किया है। आप भी पढ़ें:

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संस्मरण: मनोज पॉकेट बुक्स में मेरा पहला कदम - योगेश मित्तल

संस्मरण: मनोज पॉकेट बुक्स में मेरा पहला कदम – योगेश मित्तल

लेखक योगेश मित्तल ने अपने समय के अधिकतर प्रकाशकों के साथ कार्य किया है। मनोज पॉकेट बुक्स में भी उन्होंने लगातार लेखन किया। मनोज पॉकेट बुक्स में वो कैसे जुड़े यह वह अपने इस संस्मरण में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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दैनिक जागरण बेस्ट सेलर लिस्ट हुई जारी; इन किताबों ने सूची में बनाई जगह

2025 की तीसरी तिमाही की दैनिक जागरण बेस्ट सेलर सूची हुई जारी, इन पुस्तकों ने बनाई कथेतर श्रेणी में जगह

दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही यानी जुलाई से सितम्बर के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों की सूची जारी की जा चुकी है। कथा, कथेतर, अनुवाद और कविता श्रेणी में यह सूची जारी की गयी है। कथेतर श्रेणी में जिन पुस्तकों ने जगह बनाई है वह निम्न हैं:

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दक्षिण भारत में हमारी हिंदी प्रचार यात्रा - प्रेमचंद

दक्षिण भारत में हमारी हिंदी प्रचार यात्रा – प्रेमचंद

सन् 1934 में हिंदी प्रचार सभा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रेमचंद मद्रास गये थे। मद्रास से वह मैसूर गये और वहाँ से बेंगलुरू गये। अपनी यात्रा के दौरान उनके जो अनुभव थे उन्होंने इस लेख में उन अनुभवों के विषय में लिखा है। आप भी पढ़ें:

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साहित्य का आधार - प्रेमचंद

साहित्य का आधार – प्रेमचंद

साहित्य क्या है? साहित्य और प्रोपागैंडा में क्या फर्क है? वह क्या है जो साहित्य से प्रोपोगैंडा को जुदा करता है? इन्हीं सब बातों को साफ करते हुए प्रेमचंद ने 1932 में ये लेख लिखा था। आप भी पढ़ें:

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