किस्से मैत्रीदत्त के: नया स्कूटर - आलोक सिंह खालौरी

किस्से मैत्रीदत्त के: नया स्कूटर – आलोक सिंह खालौरी

हम सभी के जीवन में कुछ लोग ऐसे आते हैं जिनके व्यक्तित्व की गहरी छाप हमारे मन मस्तिष्क पर छूट जाती है। उनके साथ रहने पर जीवन में ऐसे रोचक प्रसंग होने लगते हैं जो भले ही घटित होने के दौरान हमारी जान सुखा दें लेकिन जिन्हें भविष्य में याद करते हुए हमारे चेहरे पर मुस्कान सी आ जाती है। लेखक आलोक सिंह खालौरी के मित्र मैत्रीदत्त भी ऐसी ही शख्सियत के मालिक थे। पढ़ें मैत्रीदत्त से जुड़ा लेखक आलोक सिंह खालौरी का लिखा यह संस्मरण ‘नया स्कूटर’

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सांता नंद मिश्र की पुस्तक 'गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती' का हुआ लोकार्पण

सांता नंद मिश्र की पुस्तक ‘गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती’ का हुआ लोकार्पण

श्री सांता नंद मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक ‘गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती’ का भव्य लोकार्पण समारोह जेएनयू कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस अवसर पर शिक्षाविदों, साहित्य प्रेमियों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण उत्सव बन गया।

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फिल्म और साहित्य - प्रेमचंद

फिल्म और साहित्य – प्रेमचंद

मई 1935 में प्रेमचंद का लिखा एक लेख ‘सिनेमा और साहित्य’ ‘लेखक’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस लेख को पढ़ने के बाद नरोत्तमप्रसाद नागर ने उस लेख का प्रतिवाद लिखा था। प्रेमचंद का वो लेख, नरोत्तमप्रसाद का प्रतिवाद और उनके प्रतिवाद का दिया गया प्रेमचंद का जवाब यहाँ पर दिया जा रह है। यह पूरा लेख हंस पत्रिका में जून 1935 में प्रकाशित हुआ था। आज भी सिनेमा और साहित्य के बीच की यह बहस प्रासंगिक है। आप भी इसे पढ़ें:

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ममता कालिया ने हिन्दी कथा और संस्मरण लेखन को नई दृष्टि दी है

ममता कालिया ने हिन्दी कथा और संस्मरण लेखन को नई दृष्टि दी है

हिंदी की वरिष्ठ लेखक ममता कालिया को उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिए जाने की घोषणा पर राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।

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लेखक अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का हुआ लोकार्पण

लेखक अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का हुआ लोकार्पण

लेखक-इतिहासकार अशोक कुमार पांडेय की नई किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का लोकार्पण 20 दिसम्बर की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में हुआ। राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस किताब के लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता सुपरिचित इतिहासकार प्रोफ़ेसर एस. इरफ़ान हबीब ने की।

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कहानी कला - शिवपूजन सहाय

कहानी कला – शिवपूजन सहाय

कहानी क्या होती है? उसकी क्या विशेषताएँ हैं? कहानी और उपन्यास में क्या फर्क है? इन प्रश्नों का उत्तर तो शिवपूजन सहाय अपने इस लेख में देते ही हैं साथ ही अपने समय के कुछ चुनिंदा कहानिकारों और चुनिंदा कहानियों से पाठकों का परिचय करवाते हैं। आप भी पढ़ें:

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दो लेखकों द्वारा मिल कर लिखी जाने वाली प्रथम शृंखला

दो लेखकों द्वारा मिल कर लिखी जाने वाली प्रथम शृंखला

योगेश मित्तल को लेखन के क्षेत्र में आने का मौका कैसे मिला और किस तरह उन्होंने अपने साथी लेखक बिमल चटर्जी के साथ मिलकर एक शृंखलाबद्ध उपन्यास लिखना शुरु किया? यह वह इस संस्मरण में साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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कहाँ-कहाँ न गये घना’दा - जयदीप शेखर

कहाँ-कहाँ न गये घना’दा – जयदीप शेखर

जयदीप शेखर लेखक और अनुवादक हैं। बांग्ला साहित्य में रुचि रखते हैं। बांग्ला से हिंदी में उन्होंने कई पुस्तकों का अनुवाद किया है। बांग्ला लेखक प्रेमेंद्र मित्र के किरदार घनादा और उसको लेकर लिखी गयी कहानियों का वह इस लेख में पाठक से परिचय करवा रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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मैं मशहूर क्यों नहीं हुआ - योगेश मित्तल

मैं मशहूर क्यों नहीं हुआ – योगेश मित्तल

योगेश मित्तल ने अपने लेखन करियर के अधिकतर वर्षों में ट्रेड नामों के लिए लेखन किया। इस कारण वह गुमनामी में रहे और उन्हें वह ख्याति न मिल सकी जो उन्हें तब मिलती जब वो अपने नाम से छपते। पर ऐसा नहीं था कि उन्हें मशहूर होने का मौके नहीं मिले थे लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि वह महशूर नहीं हो सके। लेखक योगेश मित्तल अपने शब्दों में यह बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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लंदननामा: आप भूत प्रेत पर यकीन करते हैं?

लंदननामा: आप भूत प्रेत पर यकीन करते हैं?

संदीप नैयर लंदन में रहते हैं। लंदनदनामा में वह लंदन के अपने अनुभवों को साझा करते हैं जिससे पाठक का परिचय लंदन के जीवन और वहाँ की संस्कृति से होता है। आप भी पढ़ें लंदननामा की यह किश्त:

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गुरुकुल में तीन दिन - प्रेमचंद

गुरुकुल में तीन दिन – प्रेमचंद

1927 के आषाढ़ में प्रेमचंद गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय गये थे। वह तीन दिनों तक उधर रुके रहे। वहाँ उनके जो अनुभव थे उसे उन्होंने इस वृत्तांत में लिखा है। यह वृत्तांत माधुरी पत्रिका के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:

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सरयूपार की यात्रा - भारतेंदु हरिश्चंद्र

सरयूपार की यात्रा – भारतेंदु हरिश्चंद्र

भारतेंदु हरीश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का पिता माना जाता है। उनके लिखे नाटक प्रसिद्ध हैं। ‘सरयूपार की यात्रा’ में भारतेंदु हरीश्चंद्र ने अयोध्या की यात्रा के दौरान हूए अनुभव का वर्णन किया है। आप भी पढ़ें:

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