लघुकथा शोध केंद्र भोपाल द्वारा आगामी 19 जून को लघुकथा दिवस के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार लघुकथाकार संजय पठाड़े “शेष” को उनकी लघुकथा संग्रह – ‘कही अनकही लघुकथाएँ‘ के लिए वर्ष 2021 का प्रतिष्ठित ‘विक्रम सोनी स्मृति लघुकथा सम्मान’ प्रदान किये जाने की घोषणा की गयी है।
इस पुरस्कार के अंतर्गत अंतर्गत उन्हें अभिनन्दन-पत्र, शॉल, श्रीफल, एवम 1100/- ग्यारह सौ रुपये प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।
लेखक संजय पठाडे ‘शेष’ मुल्ताई जिला बैतूल के रहने वाले हैं। वह तीस बरस से लेखन में सक्रिय हैं। वह मुख्य तौर पर व्यंग्य लिखते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनके व्यंग्य, व्यंग्य क्षणिकाएँ इत्यादि प्रकाशित होते रहते हैं। वह भोपाल से प्रकाशित होने वाले लघु-कथा वृत मासिक समाचार पत्र के उप सम्पादक भी हैं।
कही अनकही लघु-कथाएँ उनका पहला लघु-कथा संग्रह है।
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विकास नैनवाल मूलतः पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड से आते हैं और फिलहाल गुरुग्राम में वक्त गुजार रहे हैं।
किस्से कहानियाँ पढ़ने और गढ़ने का शौक है। अच्छी कहानियों को अनुवाद के माध्यम से हिंदी पाठकों के बीच लाने को भी वो लालायित रहते हैं। वह लेखन और अनुवाद के अतिरिक्त सम्पादन कार्य भी करते हैं। कई प्रकाशनों के लिए उन्होंने फ्रीलांस सम्पादन का कार्य भी किया है।
उनकी कई रचनाएँ और अनुवाद पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।
वह एक बुक जर्नल नाम से यह वेब पत्रिका और दुईबात नाम से वह अपनी व्यक्तिगत वेबसाइट का संचालन भी करते हैं।
पुस्तकें:
रचना संकलन: 'एक शाम तथा अन्य रचनाएँ', 'सलाह तथा अन्य कहानियाँ'
बाल साहित्य: 'इशिता की सूझबूझ' (सचित्र बाल कथा)
अनुवाद: नेवर गो बैक, चाल पे चाल, 'फैटल फॉलाउट: एक गलती, घातक परिणाम', 'द हाउसमेड'
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