दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही यानी जुलाई से सितम्बर के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों की सूची जारी की जा चुकी है। कथा, कथेतर, अनुवाद और कविता श्रेणी में यह सूची जारी की गयी है। कविता श्रेणी में जिन पुस्तकों ने जगह बनाई है वह निम्न हैं:
मैं अक्सर सोचता हूँ – नीलेश मिसरा

पुस्तक विवरण:
लेखक, गीतकार व कथाकार नीलेश मिसरा का यह काव्य संग्रह प्रेम, तन्हाइयों और रिश्ता टूटने के बाद के एहसासों पर आधारित हैं। इसमें मुक्त छंद, गीत और ग़ज़लें संग्रहीत की गयी हैं।
प्रकाशक: वेस्टलैंड बुक्स | पुस्तक लिंक: अमेज़न
पंछियों का सरदार – संदीप द्विवेद्वी

पुस्तक विवरण:
संदीप द्विवेदी हिंदी के चर्चित मोटिवेशनल कवि हैं, जिनकी कविताएँ न केवल प्रेरित करती हैं, बल्कि भीतर छुपी हुई हिम्मत को जगाने का काम भी करती हैं। ‘पंछियों का सरदार’ उनके चुनिंदा और श्रेष्ठ प्रेरक कविताओं का एक सशक्त संग्रह है, जो संघर्ष, आत्मविश्वास और हार न मानने की भावना को केंद्र में रखता है।
प्रकाशक: अनबाउंड स्क्रिप्ट | पुस्तक लिंक: अमेज़न
फूल हरसिंगार वाले – अंकिता सिंह

पुस्तक विवरण:
‘फूल हरसिंगार वाले’ चिर परिचित कवयित्री अंकिता सिंह की पहली गीतकृति है। विज्ञान-अभियांत्रिकी विषय की पृष्ठभूमि से आने के बावजूद हिंदी कविता के प्रति उनका अगाध प्रेम अद्वितीय है। अपने गीतों के माध्यम से नई पीढ़ी के बीच बीते एक दशक में अंकिता ने सबसे तेज़ी से अपनी स्वीकार्यता को स्थापित किया है। अंकिता पाठ्यक्रम के माध्यम से भी विद्यार्थियों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराती हैं। साथ ही, सोशल मीडिया के ज़रिये लाखों श्रोताओं के बीच अपनी गहरी पैठ बनाई है। प्रस्तुत पुस्तक में उन्होंने अपने 51 गीतों और मुक्तकों को संग्रहित किया गया है। यह गीत प्रेम, विरह एवं सामाजिक विषयों से संबंधित हैं।
प्रकाशक: हिन्द युग्म | पुस्तक लिंक: अमेज़न
प्रेम में पेड़ होना – जसिंता केरकट्टा

पुस्तक विवरण:
जसिंता केरकेट्टा की ये कविताएँ, जैसा कि स्वाभाविक है, उस प्रेम की कविताएँ नहीं हैं, जो केवल दो व्यक्तियों के बीच होता है, ये कविताएँ उस प्रेम पर केंद्रित हैं जिससे समग्र सृष्टि को सम्बल मिलता है। वह प्रेम जो मनुष्य का प्रकृति से है, वह प्रेम जो प्रकृति बिना किसी प्रतिसाद की कामना के समूची मानवता को देती है! ये कविताएँ उस क्षुद्रता को भी सम्बोधित हैं, जिसका प्रदर्शन हम प्रकृति के उस प्रेम का अन्यायपूर्ण बँटवारा करके करते हैं।
जसिंता ने बहैसियत कवि और बहैसियत व्यक्ति इस प्रेम के वैभव को बहुत नज़दीक से देखा और आत्मसात किया है; इसी प्रेम के चलते उन्होंने आदिवासी जन की पीड़ा और प्रकृति के आर्तनाद को अपनी कविता में लगातार जगह दी है। प्रेम क्यों नहीं बहुतों से हो सकता है? बहुत सारे लोगों, बहुत सारे बच्चों, स्त्रियों, पेड़-पौधों, नदी, झरनों, पहाड़ों और पूरी धरती से? वे सही ही पूछती हैं।
इस संग्रह में निसन्देह कुछ कविताओं में हमें वह प्रेम भी मिलता है; जो दो व्यक्तियों के बीच होता है। लेकिन इसे भी देखने का उनका नज़रिया वही नहीं है, जो सबके लिए सामान्य है। इसीलिए वे ये पंक्तियाँ लिख पाती हैं : प्रेम में आदमी / क्यों एक हो जाना चाहता है? / अपनी भिन्नता के साथ/क्यों दो नहीं रह पाता?—और इस प्रश्न का समाहार वे वर्तमान के एक बड़े फलक पर ले जाकर करती हैं: इधर देश के प्रेम में कुछ लोग / सबको ‘एक’ कर देना चाहते हैं / जो ‘एक’ न हो पाए, वे मारे जाते हैं।
प्रेम का अर्थ ‘क़ब्ज़ा’ नहीं होता / न किसी की देह, न ख़ुशियों, न सपनों पर—इन पंक्तियों को हम इस कविता-संग्रह का एकाग्र मंतव्य कह सकते हैं, जिसका विस्तार एक व्यक्ति से लेकर प्रकृति के विराट तक है।
प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन | पुस्तक लिंक: अमेज़न
घर के वास्ते – स्वयं श्रीवास्तव

पुस्तक विवरण:
यह लोकप्रिय युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव का पहला काव्य संग्रह है। इसके हर गीत और नज़्में पहले ही लोगों की ज़ुबान पर हैं। स्वयं श्रीवास्तव अपने समय की असल समस्याओं को उठाते हैं। उनकी कविताओं में युवा मन की बेकरारी, बेकारी, प्रेम, असफलताबोध और सौन्दर्याकांक्षा मिलेगी। जब उनकी हिन्दुस्तानी जुबान में आप इन्हीं चीज़ों को सुनते हैं तो एक ही बात जेहन में कौंधती है— “देखना तक़रीर की लज़्ज़त कि जो उसने कहा मैं ने ये जाना कि गोया ये भी मेरे दिल में है”।
प्रकाशक: अनबाउंड स्क्रिप्ट | पुस्तक लिंक: अमेज़न
