कहानी
निखिल गरीब घर से था और इसलिए एक साल पहले उसकी मोहब्बत ने भी उसका साथ छोड़ दिया था।
पर इस एक साल में निखिल ने काफी पैसा इकठ्ठा कर लिया था। अब वह दौलतमंद हो गया था। वह समझ चुका था कि आदमी के पास दौलत है तो वो सब कुछ खरीद सकता है। अपनी खोयी मोहब्बत भी।
आखिर निखिल को ये दौलत कैसे मिली थी?
क्या निखिल दौलत के बलबूते पर अपनी खुशियाँ हासिल कर पाया या ये दौलत ही उसके लिए बन गयी एक अभिशाप?
टिप्पणी
पैसा ज़िंदगी में बहुत ज़रूरी है पर उससे ज़्यादा ज़रूरी ये है कि पैसा सही रास्ते से कमाया जाये। कई बार लोग केवल पैसे पर ध्यान देते हैं और रास्ते की परवाह नहीं करते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति निखिल की कहानी यह उपन्यास ‘अभिशाप’ बयाँ करता है। डायमंड बुक्स द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के लेखक राजवंश हैं जो कि शायद एक ट्रेड नाम था। राजवंश अपने लिखे सामाजिक उपन्यासों के लिए जाने जाते थे। हिंदी लोकप्रिय साहित्य में यह उपन्यास ऐसे उपन्यास होते थे जिनकी विषय वस्तु प्रेम होती थी और कहानी को प्रेम के इर्द गिर्द बुनकर लेखक समाजिक कुरीतियों पर टिप्पणी भी किया करते थे। प्रस्तुत उपन्यास में भी ऐसा दिखता है।
उपन्यास की कहानी निखिल के अपनी पूर्व प्रेमिका मनु के घर आने से होती है। निखिल एक साल बाद मनु से मिलने आया है। इस एक साल में काफी कुछ बदल गया है। मनु की शादी जल्द ही प्रोफेसर आनंद से होने वाली है। वहीं निखिल, जो कभी इतना गरीब था कि अपने कॉलेज की फीस तक नहीं भर पाया था, अब दौलतमंद हो गया है। पर निखिल के मन में मनु के लिए अभी भी भावनाएँ हैं और मनु, जो समझती थी कि वो अपने प्रेम को भुला चुकी है, को अहसास होता है कि ऐसा नहीं है।
निखिल के मनु के जीवन में दोबारा आने से मनु के जीवन में क्या बदलाव आता है? निखिल को आखिर दौलत कहाँ से मिली और इस दौलत का निखिल, मनु और उनके नज़दीकियों की ज़िंदगी में क्या असर पड़ता है? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब उपन्यास पढ़ते हुए आपको पता चलते हैं।
सहज सरल भाषा में यह उपन्यास लिखा गया है जिसका शुरुआती हिस्सा पहले निखिल और मनु के अलग होने की परिस्थिति से पाठक को अवगत करवाता है और बाद में दौलत के इन लोगों के जीवन में पड़े असर को दर्शाता है। राजवंश के लिखे इस उपन्यास में गलत तरह से कमाई दौलत किस तरह वरदान की जगह अभिशाप बन जाती है यही दिखाया गया है। वहीं प्यार अगर स्वार्थी हो जाए तो इससे कैसे जीवन बर्बाद हो जाते हैं यह भी इधर दिखता है। इस उपन्यास में आदर्शवादी किरदार, निखिल के परिवार और आनंद के रूप में, हैं तो कई ऐसे किरदार हैं जिनके चरित्र स्याह सफेद न होकर धूसर से रहते हैं।
कहानी के केंद्र में निखिल है। निखिल का जब दिल टूटता है तो उसे अहसास हो जाता है कि दुनिया में दौलत ही सब कुछ है। वह एक आदर्शवादी परिवार का लड़का था लेकिन उसे लगने लगता है कि दौलत की चमक के आगे उसके परिवार के आदर्श एकदम फीके हैं। इस दौलत को पाने के लिए वो कुछ भी करने को तैयार हो जाता है। दौलत कमाने के लिए सही गलत के मायने उसके लिए अब मौजूद नहीं है। पर इस सब के बावजूद उसको लेखक ने पूरी तरह से निष्ठुर नहीं दर्शाया है। अपने लोगों के लिए उसके मन में प्यार मौजूद है और अपनों से मिली दुत्कार भी उसके मन में प्यार को कमज़ोर नहीं करता है। लेखक ने निखिल के रूप में ऐसा किरदार गढ़ा है जिसके प्रति पाठक के भाव बदलते रहते हैं। कभी उससे सांत्वना होती है तो कभी उस पर गुस्सा आता है और उससे नफरत भी एक समय पर पाठक कर सकता है। निखिल के रूप में लेखक ये भी दर्शाते हैं कि कई बार जब हम बुराई के रास्ते पर चलते हैं तो अपने भी उस बुराई की चपेट में आ सकते हैं और यह भी कि जब तक हमें इस बात का अहसास होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
मनु वह लड़की है जिससे निखिल प्यार करता है। मनु का किरदार लेखक ने बड़ा जटिल बनाया है। वह एक ऐसी युवती है जिसे सभी चीज़े अपने हिसाब से चाहिए। अपना स्वार्थ वो सर्वोपरि रखती है। शुरुआत से लेकर अंत तक उसका यही रवैया रहता है। वह अमीर पिता की बिगड़ैल बच्ची अधिक लगती है जो अपना स्वार्थ पूरी करने के लिए कुछ भी कर सकती है। आनंद के साथ वह जिस तरह पेश आती है उससे यह चीज़ और साफ होती दिखती है। वहीं जिस तरह से उपन्यास का अंत होता है उसे पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे ज़िंदगी ने उसे सस्ते में छोड़ दिया। सच कहूँ तो यह थोड़ा अन्यायपूर्ण लगता है। पर अगर वस्तुनिष्ठ होकर देखा जाए तो ऐसे किरदार आपको अपने आस‑पास दिख जाते हैं जिन्हें ज़िंदगी भी उतनी सज़ा नहीं देती जिसके वो लायक होते हैं। आप उनकी किस्मत से बस रश्क ही कर सकते हैं।
उपन्यास में आनंद भी एक महत्वपूर्ण किरदार है। वह एक आम सा साधारण सा युवक है जिसने प्यार को अपना सब कुछ माना। कई बार दो स्वार्थी लोगों के बीच कुछ मासूम लोग भी पिस जाते हैं। ऐसे लोग जिनकी कोई गलती नहीं होती है। आनंद भी ऐसा ही व्यक्ति है। हालाँकि उसका प्यार अंत तक खत्म नहीं होता है और वह निस्वार्थ प्रेम को भी दर्शाता है।
उपन्यास में शिल्पा भी एक रोचक किरदार है। वह प्रेम को तरजीह देती है लेकिन जरूरत के लिए अपने शरीर को बेचकर पैसे कमाने से भी गुरेज नहीं है। उसके जीवन का फलसफा मुझे थोड़ा भ्रमित सा लगा। वह अपने किये को मजबूरी का नाम देती है लेकिन जिसके साथ करती है उसे शोषित करार देकर खुद को नैतिक रूप से उससे ऊपर भी रखती है। यह बात थोड़ा खटकती है।
उपन्यास में प्रेम के विभिन्न समीकरण तो दिखाए गए हैं साथ ही लेखक ने कुछ सामाजिक मुद्दों पर भी बात की है। निखिल की बहन भारती के बहाने लेखक यह दर्शाने में कामयाब होते हैं कि दहेज के चलते कई बार स्त्री को किस तरह से अत्याचार सहना पड़ता है। वहीं भारती के माता-पिता के रूप में वह ऐसे माता पिता को प्रस्तुत करते हैं जिनसे ये सीखा जा सकता है कि ऐसे मामले में कैसे माँ-बाप अपनी बच्ची का साथ दे सकते हैं। कई बार माता-पिता अपनी बच्ची की तरफ़ उदासीन रवैया रखते हैं जिसके चलते कई बार बच्चियों की जान पर बन आती है। ऐसे कई उदाहरण हाल फिलहाल में सामने आए हैं जहाँ माता-पिता ने अपनी बच्चियों का साथ दिया होता तो वो ज़िंदा होतीं पर ऐसा न होने के चलते उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
उपन्यास में निखिल दौलत कमाने के लिए जो कार्य करता है वह आज भी धड़ल्ले से चलता है और कई बार मासूमों को उसमें फँसाया जाता है। कई बार उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जाता है और कई बार उन्हें धोखे से फँसाया जाता है। समाज के इस पहलु पर भी लेखक एक सरसरी नजर डालते दिखते हैं।
उपन्यास की कमियों की बात करूँ तो कुछ चीजें ऐसी थी जो समझ नहीं आती है। निखिल को पैसे किस तरह मिले वह आखिर में पता लगता है। वह पैसे बहुत अधिक रहते हैं। उतने पैसे से कोई भी व्यक्ति कुछ भी ऐसा काम कर सकता था जो कि कानून के अंदर आता हो। निखिल आदतन अपराधी भी नहीं था। ऐसे में उसका उस लाइन में उतरना जिसमें वह शहर लौटने के दौरान काम कर रहा होता है वो खटकता सा है। कोई मजबूत कारण इसका नहीं दिखता है। ऐसा लगता है कि लेखक को निखिल का अंत एक तरह से दर्शाना था तो वह इसलिए उससे ये काम करवा रहे थे। अगर लेखक इस लाइन में उतरने का कोई मजबूत कारण देते तो बेहतर होता।
वहीं अंत जल्दबाज़ी में किया गया लगता है और कुछ चीजें अटपटी लगती हैं। निखिल एक के बाद एक ऐसी चीज़ें करता चला जाता है जो कि उसे उसके अंत तक ले जाती है पर यह चीजें प्राकृतिक नहीं लगती है। ऐसा लगता है लेखक को क्योंकि अंत करना था तो वो जबरदस्ती किरदारों को उस दिशा में धकेल रहे हैं।
जैसे निखिल चाहता है कि उसके छोटे भाई की शादी एक लड़की से न हो। लेकिन वह न उस लड़की को अपने रिश्ते के विषय में बताता है और न ही अपने परिवार को उस लड़की के विषय में बताता है। जबकि वह लड़की को तो आसानी से बता सकता था अपने छोटे भाई के विषय में। फिर वह अपनी परिवार को सीधे न सही तो अप्रत्यक्ष रूप से खुद न सही लेकिन अपने आदमियों द्वारा बतला सकता था। पर ऐसा भी नहीं होता है।
वहीं निखिल को उसके पापों का अहसास कराने के लिए जो तरीका लेखक अपनाते हैं वो थोड़ा फोर्स किया हुआ लगता है। पाठक पढ़ते हुए सहज ही अंदाजा लगा लेता है कि आगे क्या होगा। इसके अतिरिक्त जिस किरदार के साथ लेखक वो बुरी चीज़ होती दर्शाते हैं उसका पूरे उपन्यास में खाली ज़िक्र भर होता है। उसकी इतनी मौजूदगी नहीं रहती है कि आपका उसके साथ कोई जुड़ाव महसूस हो। मुझे लगता है लेखक अगर उस किरदार की मौजूदगी बढ़ाते और पाठक को उससे जोड़कर रखते तो जो कार्य हुआ उसका असर काफी ज्यादा होता। अभी भी उस किरदार का हश्र मन को दुखाता तो है लेकिन वो उतना प्रभावी नहीं बन पाता है जितना तब होता जब पाठक उसे अधिक जाने होते।
उपन्यास में आनंद और भारती दो किरदार ऐसे हैं जिनकी शादी लगभग टूटी हुई रहती है। इस शादी के टूटने में इनके बजाए इनके साथियों का हाथ अधिक रहता है। पर लेखक कहानी के अंत में इनके साथ जो हुआ दर्शाते हैं वह भी मुझे आज अटपटा लगा। हो सकता है ये उपन्यास काफी पहले लिखा गया था तो शायद लेखक शादी की महत्ता दिखाना चाहते रहे हों इसलिए उन्होंने ऐसा अंत किया। पर यह अंत मुझे अतार्किक और ज़बरदस्ती का लगता है। मुझे लगता है इनके बीच एक तरह का रोमांटिक कोण जो बन रहा था वैसा लेखक नही चाहते होंगे लेकिन अगर लेखक इन किरदारों को अपने जीवन में अलग लोगो के साथ भी खुश दर्शाते तो बेहतर होता। अभी तो इनके अपने‑अपने साथी इनके लिए सही व्यक्ति नहीं ही लगते हैं।
अंत में यही कहूँगा उपन्यास सहज सरल भाषा में लिखा गया है और पाठक को बाँध कर रखता है। निखिल, मनु और आनंद का जो एक प्रेम त्रिकोण बनता है उसका आखिरकार क्या होगा और इसके चलते इन किरदारों के जीवन में क्या असर पड़ेगा ये देखने के लिए आप उपन्यास पढ़ते चले जाते हैं। अगर उपन्यास के आखिर के भाग पर कुछ और अधिक काम होता तो उपन्यास और अधिक प्रभावी बन सकता था। सामाजिक उपन्यास आपको पसंद आते हैं तो इसे पढ़कर देख सकते हैं।
प्रकाशक: डायमंड बुक्स | पुस्तक लिंक: अमेज़न
