न बैरी न कोई बेगाना: कुछ आपबीती, कुछ जगबीती

सुरेन्द्र मोहन पाठक आज हिन्दी अपराध साहित्य के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले लेखक हैं। सन 2018 में जब उनकी आत्मकथा का पहला भाग न बैरी न कोई बैगाना प्रकाशित हुआ था तो मित्र राशीद शेख ने पुस्तक पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखी थी। उस वक्त यह लेख एक हिन्दी अखबार में भी प्रकाशित हुआ था। राशीद शेख का लिखा यह लेख बहुत ही खूबसूरत तरीके से किताब के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है। आप भी पढ़िए।

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पुस्तक टिप्पणी: ओ पी नैय्यर: दुनिया से निराला हूँ, जादूगर मतवाला हूँ!

‘दुनिया से निराला हूँ, जादूगर मतवाला हूँ’: एक किताब, जिसे एकाग्र होकर पढ़ना है मुश्किल

ओंकार प्रसाद नय्यर (16 जनवरी 1926 – 27 जनवरी 2007), अपने नाम के संक्षिप्त रूप ओ॰ पी॰ नय्यर से लोकप्रिय हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध संगीतकार थे जो लाहौर में पैदा हुए थे तथा अपने चुलबुले संगीत के लिये जाने जाते थे। 2018 में पराग डिमरी जी द्वारा लिखित ओ पी नैय्यर जी की जीवनी दुनिया से निराला हूँ,जादूगर मतवाला हूँ प्रकाशित हुई थी।
‘दुनिया से निराला हूँ, जादूगर मतवाला हूँ’ के ऊपर राशीद शेख जी ने यह लेख लिखा है।

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