30 नवम्बर, 2025 (रविवार)
नई दिल्ली। राजकमल प्रकाशन समूह हिंदी उपन्यास का स्त्री-वर्ष मना रहा है। इसके तहत 3 दिसम्बर 2025 को हिंदी की नौ स्त्री-कथाकारों के उपन्यास एकसाथ लोकार्पित किए जाएँगे। यह विशेष आयोजन राष्ट्रीय राजधानी स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में होगा। राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वर ने शनिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा, 21वीं सदी स्त्रियों की सदी है। स्त्रियाँ आज साहित्य, समाज और संस्कृति के हर क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रहीं हैं। इसी रचनात्मक उठान को केंद्र में रखते हुए हम हिंदी उपन्यास का स्त्री-वर्ष मना रहे हैं। यह पहली बार है जब हिंदी की नौ प्रमुख स्त्री कथाकारों के उपन्यास एकसाथ प्रकाशित हो रहे हैं। प्रकाशित होने वाले उपन्यास यह हैं:
शुकमाया हांगमा (शोभा लिम्बू), सह-सा (गीतांजलि श्री), कलकत्ता कॉस्मोपॉलिटन : दिल और दरारें (अलका सरावगी), दूर देश के परिंदे (अनामिका), शीशाघर (प्रत्यक्षा), सरकफंदा (वंदना राग), इस शहर में इक शहर था (जया जादवानी), दरयागंज वाया बाज़ार फ़त्ते ख़ाँ (सुजाता), जहाज़ पाँच पाल वाला (सविता भार्गव)।

हिंदी उपन्यास के स्त्री वर्ष के विषय में बात करते हुए अशोक महेश्वरी ने कहा, स्त्री-लेखन आज न केवल अपने विशिष्ट अनुभवों को व्यक्त कर रहा है, बल्कि समाज के प्रश्नों को नए आयाम भी दे रहा है। यह वह समय है जब स्त्री-स्वर हमारे साहित्यिक और सामाजिक ढाँचों को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। हिंदी उपन्यास का स्त्री-वर्ष उसी रचनात्मकता को रेखांकित करने का हमारा विनम्र प्रयास है।
उन्होंने बताया कि इन स्त्री कथाकारों में इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार से सम्मानित कथाकार गीतांजलि श्री, साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित अलका सरावगी और अनामिका से लेकर चर्चित कथाकार प्रत्यक्षा, वंदना राग, जया जादवानी, सुजाता, सविता भार्गव और शोभा लिम्बू शामिल हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुपरिचित कथाकार मृदुला गर्ग करेंगी। इस दौरान उपन्यासों के लोकार्पण साथ ही पाठ और चर्चा के सत्र भी होंगे।
