अरुंधति रॉय की किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिंदी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से प्रकाशित

अरुंधति रॉय की किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिन्दी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से प्रकाशित
  • ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिन्दी में आना मेरे लिए अहम: अरुंधति रॉय
  • 18 जुलाई को पटना में होगा ‘मेरी माँ, मेरी गैंगस्टर’ किताब का लोकार्पण
  • राजकमल और अर्थशिला की साझा पहल ‘परस्पर’ के पहले आयोजन में होगा किताब का लोकार्पण 

11 जुलाई, 2026, नई दिल्ली/पटना: अरुंधति रॉय की बहुप्रशंसित किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिंदी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है। इसका हिंदी अनुवाद प्रभात सिंह ने किया है। किताब का लोकार्पण 18 जुलाई 2026 को अर्थशिला, पटना में आयोजित एक विशेष समारोह में होगा। यह कार्यक्रम राजकमल प्रकाशन समूह और अर्थशिला की साझा पहल ‘परस्पर: संवाद की सबरंगी दुनिया’ शृंखला का पहला आयोजन होगा।

रूबरू होंगी अरुंधति रॉय

अरुंधती रॉय
अरुंधति रॉय

लोकार्पण समारोह में लेखक अरुंधति रॉय और अनुवादक प्रभात सिंह समेत साहित्यिक-सांस्कृतिक क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहेंगी। इस अवसर पर किताब और उसके विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं पर कथाकार प्रत्यक्षा लेखक और अनुवादक से बातचीत करेंगी।

लड़कियाँ इस किताब को ज़रूर पढ़ें: अरुंधति रॉय

हिंदी संस्करण को लेकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अरुंधति रॉय ने कहा, इस किताब का 45 से ज्यादा भाषाओं में अनुवाद हो चुका है, लेकिन मेरे लिए अंग्रेजी, मलयालम और हिंदी संस्करण सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। हिंदी अनुवाद को पूरी तरह निखारने के लिए प्रभात जी, मैं और राजकमल के सम्पादक एक साथ बैठे। हमने लगातार दस दिनों तक रोज करीब दस-दस घंटे लगाकर इसे अंतिम रूप दिया है। मैं बेहद खुश हूँ कि अब यह किताब हिंदी में आ रही है। मैं चाहती हूँ कि ख़ास तौर पर लड़कियाँ इस किताब को जरूर पढ़ें।

खिताबी अनुवाद: प्रभात सिंह

प्रभात सिंह
प्रभात सिंह

अनुवादक प्रभात सिंह ने कहा, मेरे लिए यह अनुवाद अपनी सारी सिद्धियों, अपने सारे रियाज़ की कसौटी साबित हुआ। इसलिए नहीं कि ‘मदर मेरी कम्स टु मी’ बहुचर्चित और ख़िताबी किताब है और किसी ऐसी किताब पर काम करने का दबाव थोड़ा अलग क़िस्म का होता है, बल्कि इसलिए कि कहन की वह विशिष्टता, जो अरुंधति रॉय की पहचान है, गूढ़ अभिव्यक्तियों, वक्रोक्तियों और भावपूर्ण भाषा को बूझने के साथ ही उनका लालित्य ज्यों का त्यों सँजोने की सिद्धि भी दरकार थी। इसलिए कि रॉय को शब्दों की फ़ुज़ूल-ख़र्ची से सख़्त परहेज़ है।

ज्ञात हो ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ अरुंधति रॉय का एक बेहद आत्मीय संस्मरण है, जिसमें वे अपनी माँ मैरी रॉय के साथ अपने जटिल, प्रेम और टकराव से भरे रिश्ते के बहाने स्मृति, परिवार, स्त्री-अस्मिता, सत्ता, मातृत्व और आत्म-पहचान जैसे गहरे मानवीय प्रश्नों की पड़ताल करती हैं। यह केवल एक माँ-बेटी की कहानी नहीं, बल्कि उस भावनात्मक और सामाजिक भूगोल का दस्तावेज़ है, जहाँ निजी जीवन और इतिहास एक-दूसरे में घुलते-मिलते हैं।

कार्यक्रम विवरण:
आयोजन: मेरी माँ मेरी गैंगस्टर (लोकार्पण और बातचीत)
दिनांक: 18 जुलाई 2026 (शनिवार)
समय: शाम 5:30 बजे
स्थान: अर्थशिला परिसर, पटना


FTC Disclosure: इस पोस्ट में एफिलिएट लिंक्स मौजूद हैं। अगर आप इन लिंक्स के माध्यम से खरीददारी करते हैं तो एक बुक जर्नल को उसके एवज में छोटा सा कमीशन मिलता है। आपको इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। ये पैसा साइट के रखरखाव में काम आता है। This post may contain affiliate links. If you buy from these links Ek Book Journal receives a small percentage of your purchase as a commission. You are not charged extra for your purchase. This money is used in maintainence of the website.

Author

  • 'एक बुक जर्नल' साहित्य को समर्पित एक वेब पत्रिका है जिसका मकसद साहित्य की सभी विधाओं की रचनाओं का बिना किसी भेद भाव के प्रोत्साहन करना है।
    सन् 2012 से हम यह कार्य निरंतर रूप से कर रहे हैं। यह प्रोत्साहन रचनाओं के ऊपर पाठकीय टिप्पणी प्रकाशित करके, नयी साहित्यिक कृतियों की जानकारी साझा करके, साहित्य से जुड़ी खबरे साझा करके और लेखकों द्वारा भेजी गयी उनकी रचनाओं को प्रकाशित करके किया जाता है। हमारी कोशिश है एक वृहद पाठक वर्ग तक इन जानकारियों को पहुँचाया जाए।
    आप भी साहित्य और लेखन से सम्बंधित लेख, अपनी पुस्तक का अंश और अपनी रचनाएँ हमें भेज कर इस मुहिम में सहयोग दे सकते हैं।
    हमारा पता है: contactekbookjournal@gmail.com

    View all posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *