डॉ. शोभा विजेंद्र की पुस्तक ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता-विलक्षण एकात्मकता’ का हुआ लोकार्पण

डॉ. शोभा विजेंद्र की पुस्तक ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता-विलक्षण एकात्मकता’ का हुआ लोकार्पण

19 मार्च 2026 नई दिल्ली: कल 18 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रसिद्ध समाज सेविका और लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र की पुस्तक ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता-विलक्षण एकात्मकता’ का लोकार्पण हुआ। इसकी अध्यक्षता की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर ने। विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता जी उपस्थित थे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष पूरे हो गए हैं और इसी संदर्भ में लेखिका ने महिलाओं की संघ में सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषय को उठाते हुए इस पुस्तक को बहुत ही रोचक ढंग से लिखा है।

डॉ. विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पूरी पुस्तक को लेखिका ने एक कहानी के रूप में विस्तार दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक शताब्दी की गाथा, समर्पण व प्रेरणा की यात्रा है। इस यात्रा में महिलाओं की भूमिका, उनकी ऊर्जा और सहभागिता को समर्पित है यह पुस्तक।

डॉ. शोभा विजेंद्र ने इस अवसर पर कहा कि यह पुस्तक तीन भागों में विभाजित है। इस पुस्तक के पहले भाग में बचपन से लेकर अब तक संघ के साथ जुड़े उनके अनुभवों का वर्णन है। भाग दो में प्रथम सरसंघचालक से लेकर वर्तमान सरसंघचालक तक के विचार और भाषण हैं। साथ ही इसमें जीवन के मुद्दों को भी उठाया गया है जैसे क्या मतलब है महिला स्वतंत्रता का, क्या मतलब है महिला समानता का या उसकी सशक्तिकरण का, सनातन का क्या मतलब है। अपने धर्म का पालन करने से क्या समस्या आती है या नहीं या पालन न करने से आती है, इन सभी प्रश्नों के उत्तर महिलाओं के लिए आवश्यक हैं और इस पुस्तक में उनका उत्तर देने का प्रयास किया गया है। भाग तीन में 34 महिलाओं के संस्मरण व महिला शक्ति की प्रेरक कहानियाँ आलेखों के रूप में हैं और बहुत ही जीवंत रूप से प्रस्तुत करती हैं।

सुनील आंबेकर जी ने कहा कि जिन 34 महिलाओं ने इसमें आलेख लिखे हैं, वे उनके स्वयं के अनुभवों से पोषित हैं। इस पुस्तक में ऐसी बातें निकल कर आई हैं कि जो कठिन होकर भी सरल शब्दों में व्यक्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष हो गए हैं और 1925 में डॉ. हेडगेवार ने नागपुर में इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी। 1936 में महिलाओं की भागीदारी को भी समझा गया और उन्हें शाखाओं से जोड़ा गया। विश्व में महिलाओं के प्रति जो धारणाएँ हैं, उसकी वजह से समाज में बहुत सारी समस्याएँ उत्पन्न हुईं और उसके समाधान का एक नवजागरण युग आरम्भ हुआ और उन्होंने यह माना कि यह पुरुष व स्त्री के बीच का संघर्ष है और दोनों को किसी न किसी तरह से जीतना है। लेकिन भारत जो उस दौर से गुजरा तो लेकिन भारत में समस्या आध्यात्मिक परम्परा के कारण उत्पन्न नहीं हुई थी। यहाँ एक प्रतिस्पर्धा न मानकर स्त्री पुरुष को एक दूसरे का पूरक माना गया। संघ केवल एक विचार लेकर किसी समाधान और परिवर्तन की बात नहीं करता, वरन समग्रता से विचार करता है।

शोभा जी ने कहा कि यह पुस्तक उस नैरेटिव का खंडन करने के लिए लिखी गई है जो भ्रामक है, ताकि आने वाला इतिहास संघ को, समिति को, राष्ट्र के लिए काम करने वाली सभी संस्थाओं को सही दृष्टिकोण से देखे।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रभात प्रकाशन के निदेशक पीयूष कुमार जी ने कहा हमने संघ शताब्दी के अवसर पर कई पुस्तकों का प्रकाशन किया है और यह पुस्तक भी उससे ही जुड़ी एक कड़ी है।


FTC Disclosure: इस पोस्ट में एफिलिएट लिंक्स मौजूद हैं। अगर आप इन लिंक्स के माध्यम से खरीददारी करते हैं तो एक बुक जर्नल को उसके एवज में छोटा सा कमीशन मिलता है। आपको इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। ये पैसा साइट के रखरखाव में काम आता है। This post may contain affiliate links. If you buy from these links Ek Book Journal receives a small percentage of your purchase as a commission. You are not charged extra for your purchase. This money is used in maintainence of the website.

Author

  • सुमन बाजपेयी

    सुमन बाजपेयी पिछले तीन दशकों से ऊपर से साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। 'सखी' (दैनिक जागरण की पत्रिका ), मेरी संगिनी और 4th D वुमन में वो असोशीएट एडिटर रह चुकी हैं। चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट में उन्होंने सम्पादक के रूप में कार्य किया है। सम्पादक के रूप में उन्होंने कई प्रकाशकों के साथ कार्य किया है। अब स्वतंत्र लेखन और पत्रकारिता कर रही हैं।

    कहानियाँ, उपन्यास, यात्रा वृत्तान्त वह लिखती हैं। उनके बाल उपन्यास और बाल कथाएँ कई बार पुरस्कृत हुई हैं।

    वह अनुवाद भी करती हैं। सुमन बाजपेयी अब तक 150 से ऊपर पुस्तकों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद कर चुकी हैं।

    हाल ही में प्रकाशित उनके उपन्यास 'द नागा स्टोरी ' और 'श्मशानवासी अघोरी' पाठकों के बीच में खासे चर्चित रहे हैं।

    उनके बाल उपन्यास तारा की अनोखी यात्रा, क्रिस्टल साम्राज्य, मंदिर का रहस्य बाल पाठकों द्वारा पसंद किये गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *