विगत 25 दिसंबर 2025 के दिन, प्रयागराज पुस्तक मेले के मंच पर, प्रयागराज के महापौर श्री उमेश चंद्र गणेश केसरवानी एवं आदरणीय पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री नरेंद्र कुमार सिंह गौर द्वारा ‘प्रयागराज प्रदर्शनी— महाकुंभ की महागाथा’ तथा ‘जासूस बब्बन बिहारी’ का विमोचन किया गया।
मंच पर चित्रकथा ‘प्रयागराज प्रदर्शनी— महाकुंभ की महागाथा’ के चित्रकार एवं लेखक अंशुदीप धुसिया, ग्राफिक डिजाइनर आलोक कुमार तथा सह प्रकाशक संजीव कुमार को सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम रंगकर्मी राहुल सागर के संयोजन में, संस्था कलर्स ऑफ कल्चरल एंड आर्ट्स फाउंडेशन एवं पुस्तक मेला, प्रयागराज प्रबंधन के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ था।

बताते चलें ‘प्रयागराज प्रदर्शनी— महाकुंभ की महागाथा’ का प्रकाशन प्रकाशन ऋग्सिंधु प्रकाशन द्वारा किया गया है। इस चित्रकथा में प्रयागराज नगर का आध्यात्मिक इतिहास, कुछ सुने-अनसुने प्राचीन कथानकों के माध्यम से पेश किया गया है। प्रयागराज को ‘प्रयागराज’ नाम क्यों मिला, इससे जुड़ा ‘इलाहाबाद’ शब्द सर्वप्रथम कहां से अस्तित्व में आया, महाकुंभ को ‘महाकुंभ’ ही क्यों कहा जाता है? इन प्रश्नों के उत्तर खोजने का प्रयास करती आज के एआई के दौर में एक वॉटर कलर पेंटेड आर्टवर्क से सजी हुई है ये कॉमिकबुक। कथानक में महाकुंभ व प्रयागराज के साथ ही मानव सभ्यता के विकास की वैज्ञानिक, ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक कथा भी कही गई है। पौराणिक गाथाओं के साथ ही प्रयागराज के बुद्धिजीवी साहित्यकारों, रचनाधर्मी कलाकारों एवं वीर क्रांतिकारियों का भी प्रस्तुत पुस्तक में परिचय प्राप्त किया जा सकता है।
वहीं विमोचित हुई दूसरी कॉमिक्स ‘जासूस बब्बन बिहारी’ का नायक जासूस बब्बन बिहारी एक प्राईवेट डिटेक्टिव है जो प्रस्तुत कॉमिकबुक में एक ऐसी मौत का रहस्य सुलझा रहा है जो कि एक ‘भावनात्मक दुर्घटना का असर’ है, या ‘स्वास्थ्य समस्या का परिणाम’ या फिर ‘हत्या’, यह समझना लगभग असम्भव है। इंक वॉश शैली में चित्रित इस चित्रकथा में वर्तमान राजनीतिक वातावरण और आज के दौर की अप्रत्याशित स्वास्थ्य समस्याओं को भी कहानी में कुशलतापूर्वक बुना भी गया है। ‘जासूस बब्बन बिहारी’ की परिकल्पना सुरजीत बेसरा ने की है तथा उसका लेखन एवं चित्रांकन अंशुदीप धुसिया ने किया है।
जल्द ही यह चित्रकथाएँ सभी मुख्य ऑनलाइन पोर्टल्स और कॉमिक बुक सेलरों के पास क्रय के लिए उपलध होंगी।
